VEETRAAG (Poems) by Vasu Gandharv
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वीतराग — वसु गंधर्व (कविता-संग्रह)
हमारे स्मृतिहीन समय में कविता में भी विस्मृति व्याप गयी है। युवा कवि वसु गंधर्व की कविता इस प्रवृत्ति का अपवाद है। उसमें ‘स्मृतियों का अपना गल्प’ सहेजने का जतन है। उनके यहाँ अनन्त, शाश्वत, प्राचीन, उद्गम, प्रागैतिहासिक नींद, निराकार पतझर, निर्लिप्त तन्मयता, उँगलियों की प्राचीन उष्णता जैसे शब्द और अभिव्यक्तियाँ उनकी कविताओं को स्मृति की मोहक आभा देते हैं। वे सब घटित होते हैं ऐसे कविता-संसार में जिसमें चश्मा, चेहरा, खाली जगहें, थकना, धीमापन, धूप-बारिश, विदा, पीड़ा, भाई, माँ, पितामह, सोना, ढूँढ़ना, पानी, शोक, गोश्त, बक्सा, नींद, दीमक, नीलाम्बरी, बीज, क़मीज़, धूल आदि सब है जो उसे विपुल बनाते हैं। यह ऐसी कविता है जिसमें संग-साथ और निस्संगता दोनों हैं। भाषा की चमक इन कविताओं की असली चमक है।
रजा फ़ाउण्डेशन युवा कवियों की पहली कविता-पुस्तकें प्रस्तुत करने पर एकाग्र ‘प्रकाश वृत्ति’ के अन्तर्गत वसु गंधर्व के पहले संग्रह ‘वीतराग’ को प्रस्तुत करते हुए प्रसन्नता अनुभव कर रहा है।
— अशोक वाजपेयी
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Description
VEETRAAG (Poems) by Vasu Gandharv
About The Author
वसु गंधर्व
जन्म : ८ फ़रवरी २००१
अम्बिकापुर, छत्तीसगढ़ में बचपन बीता।
अँग्रेज़ी, अर्थशास्त्र और मनोविज्ञान में स्नातक ।
पत्र-पत्रिकाओं और वेब ब्लॉग्स में कविताएँ और आलेख प्रकाशित ।
‘रचना समय’ भोपाल से चालीस कविताओं की एक पुस्तिका, ‘किसी रात की लिखित उदासी में’ प्रकाशित ।
शास्त्रीय संगीत के गम्भीर छात्र, अनेक घरानों में तालीम, कुछ वर्षों तक कोलकाता में पं. अजय चक्रवर्ती से गायन की शिक्षा ली।
वर्तमान में EFLU हैदराबाद में अध्ययनरत ।
साहित्य के अलावा दर्शन और अर्थशास्त्र में रुचि। अनुवाद में दिलचस्पी ।
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