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JAISHANKAR PRASAD : SRIJAN KE AAYAM by Deoshanakar Navin
About the Author
देवशंकर नवीन
जन्म : 02 अगस्त 1962.
सोलह वर्षों तक नेशनल बुक ट्रस्ट में सम्पादन-कार्य और पाँच वर्षों तक इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में अध्यापन के बाद सम्प्रति भारतीय भाषा केन्द्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली में प्रोफ़ेसर पद पर कार्यरत हैं। नेशनल बुक ट्रस्ट, प्रकाशन विभाग, साहित्य अकादेमी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, राजकमल प्रकाशन, वाणी प्रकाशन, किताबघर प्रकाशन, अन्तिका प्रकाशन, चतुरंग प्रकाशन, नवारम्भ प्रकाशन, विजया बुक्स, श्रुति प्रकाशन, सेतु प्रकाशन जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों द्वारा प्रकाशित मैथिली एवं हिन्दी में उनकी लिखित चौदह, सम्पादित चौबीस, अनूदित आठ कृतियों में से प्रमुख हैं- साहित्य और समाज की बात, राजकमल चौधरी : जीवन और सृजन, अनुवाद अध्ययन का परिदृश्य, अक्खर खम्भा, भारत का प्राचीन इतिहास, सरोकार… आदि। अँग्रेजी सहित कई अन्य भारतीय भाषाओं में रचनाएँ अनूदित। लगभग ढाई दर्जन श्रेष्ठ संकलनों एवं स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में साढ़े तीन सौ से अधिक आलेख प्रकाशित। सन् 1991 में हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा श्रेष्ठ युवाकवि पुरस्कार, 2013 में उ.प्र. हिन्दी संस्थान सौहार्द सम्मान, 2015 में डीबीडी कोशी सम्मान, 2017 में बिहार सरकार के राजभाषा विभाग द्वारा विद्यापति सम्मान, 2019 में नयी धारा रचना सम्मान, 2021 में दिनकर राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित ।






























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