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ES RAVINDRANATH KO BHI TO JANIYE by Alok Bhattacharya

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इस रवीन्द्रनाथ को भी तो जानिए – आलोक भट्टाचार्य


साधारण पढ़े-लिखों की बात छोड़ भी दें, प्राध्यापकों और लेखकों-पत्रकारों का भी अधिकांश वर्ग रवीन्द्रनाथ के बारे में निहायत ही सतही जानकारी रखता है, इतना भर ही कि रवीन्द्रनाथ ने देश के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की रचना की, उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला और उन्होंने शान्तिनिकेतन की स्थापना की। इस छोटे से ज्ञान के बाद रवीन्द्रनाथ के बारे में वे ये बड़े-बड़े अज्ञान जरूर रखते हैं कि ‘जन गण मन’ रवीन्द्रनाथ ने अँग्रेज वाइसरॉय जॉर्ज पंचम के स्वागत में रचा था! और यह भी कि देश के स्वतन्त्रता संग्राम में रवीन्द्रनाथ का कोई योगदान नहीं! रवीन्द्रनाथ बहुत ही अमीर थे, उच्चवंशीय थे, अभिजात रुचिसम्पन्न थे, इसलिए उन्हें देश की गरीब जनता से कोई मतलब नहीं था !
वाकई यह अज्ञान अत्यन्त ही दुर्भाग्यपूर्ण है। खासकर हिन्दीभाषी समाज के सन्दर्भ में, क्योंकि हिन्दी साहित्य को रवीन्द्रनाथ ने जो कुछ दिया, उतना तो खुद बड़े-बड़े हिन्दी साहित्यकारों ने भी नहीं दिया। हिन्दी साहित्य को रवीन्द्रनाथ ने कबीर दिया, हजारीप्रसाद दिया, निराला दिया, मैथिलीशरण गुप्त दिया, शिवानी भी हिन्दी को रवीन्द्रनाथ की देन हैं। हिन्दी समाज सहित सम्पूर्ण देश को रवीन्द्रनाथ ने हिन्दीभाषी प्रदेश इलाहाबाद के पं. जवाहरलाल नेहरू का आधुनिकता बोध दिया। महात्मा गांधी की ग्राम-चेतना दी, अछूतोद्धार दिया।
खेद की बात तो यह है कि विद्वानों तक को इन तथ्यों का पता नहीं, और न ही उन्हें यह सब पता करने की परवाह है। यह लज्जा तब और घनी एवं अक्षम्य हो जाती है, जब गलत जानने के आधार पर हम वाकई एक महान् और पूर्णतः निर्दोष व्यक्ति पर कई प्रकार के आरोप लगाते हैं। लांछन लगाते हैं … यह पुस्तक इस दुष्प्रवृत्ति के खिलाफ आपत्ति से कहीं ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण अपरिचय को दूर करने का एक विनम्र प्रयास है।
– भूमिका से


 

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ES RAVINDRANATH KO BHI TO JANIYE by Alok Bhattacharya


About The Author

आलोक भट्टाचार्य
कवि-कथाकार। पेशे से पत्रकार। मातृभाषा बांग्ला । हिन्दी में मौलिक लेखन। मुम्बई के हिन्दी साहित्य एवं पत्रकारिता जगत में सक्रिय।
प्रकाशन : कविता संग्रह ‘भाषा नहीं है बैसाखी शब्दों
की’ (1990) उपन्यास ‘अपना ही चेहरा’ (1994), कहानी संग्रह ‘आंधी के आसपास’ (2000), कविता संग्रह ‘सात समंदर आग’ (2002), संस्मरण ‘पथ के दीप’ (2005), साम्प्रदायिकता और जातिवाद के खिलाफ वैचारिक लेखों का संग्रह’ अधार्मिक’ (2006)। बांग्ला के कई शीर्ष कवियों की कविताओं के अलावा डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के काव्य संग्रह माई जर्नी का हिन्दी अनुवाद मेरी यात्रा।
पुरस्कार : महाराष्ट्र हिन्दी साहित्य अकादमी का ‘संत
नामदेव पुरस्कार’ (1991) केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय का ‘हिन्दीतर भाषी श्रेष्ठ हिन्दी लेखक अखिल भारतीय पुरस्कार’ (1995) महाराष्ट्र हिन्दी साहित्य अकादेमी का ‘जैनेन्द्र कुमार पुरस्कार’ (1996) अम्बिका प्रसाद दिव्य रजत अलंकरण पुरस्कार (2001) राष्ट्रीय हिन्दी पत्रलेखक संघ का ‘श्रेष्ठ मंच संचालक पुरस्कार’ (1998) पत्रकारिता के लिए ‘गणेश शंकर विद्यार्थी हिन्दी पत्रकारिता पुरस्कार’ (1994) ‘नागरीभूषण सम्मान’ (2006), भारतीय मानव सेवा संघ का ‘साहित्यभूषण सम्मान’ (2007), ‘निराला सम्मान’ (2009) महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी का सुब्रह्मण्यम भारती अ. भा. साहित्य सम्मान (2013)


ES RVINDRANATH KO BHI TO JANIYE by Alok Bhattacharya

Additional information

Author

Alok Bhattacharya

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-841-0

Pages

176

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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