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KHALI HANTHON SI YEH KAYA (Poems) by Dhruv Shukla

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खाली हाथों सी यह काया – ध्रुव शुक्ल


कविता और इतिहास के रिश्ते को परिभाषित करते हुए कवि ऑक्टोवियो पॉज ने अपनी एक नेत्रोन्मीलक टिप्पणी में बताया है कि समपक्षसम्भवा होते हुए भी कविता का अपना एकमात्र ‘मिशन’ इतिहास का तत्त्वान्तरण करना होता है और इसी प्रक्रिया में वह उन सारी शक्तियों का नकार हो जाती है जो मनुष्य की स्वतन्त्र चेतना को नियन्त्रित निर्देशित करना चाहती हैं। ये शक्तियाँ विभिन्न मतवादों और सांस्थानिक अनुशासनों की तो होती ही हैं, स्वयं कवि के अपने पूर्वग्रहों की भी हो सकती हैं, जिन्हें कवि मुक्तिबोध ने ‘जड़ीभूत सौन्दर्याभिरुचि’ कहा था।
समकालीन हिन्दी कविता में ध्रुव शुक्ल उन अल्पसंख्यक कवियों में हैं, जो कविता को, किसी भी प्रकार के बाहरी और कवि के अपने आग्रहों से भी परे, उसकी अपनी शर्तों पर होने देते हैं। इसीलिए वह कविता अपनी जटिलता में भी सहज सम्प्रेष्य बनी रहती है। ‘सात रुपये रोज खर्च करके अपने खिलाफ खबरें पढ़ते रहना’ अथवा मगर की दाढ़ों में फँसे माँस के टुकड़े निकालती चिड़िया में भूख, शिकार और मृत्यु के बीच समझौते को पहचानती उनकी कविता खबर की भयावहता के बीच न जाने किस बात पर बच्चों का हँसना, जहाँ एक ओर हमारे भयावह समय की मानव विरोधी चारित्रिकता को उजागर करती है, बल्कि कहीं एक अदम्य आस्था को भी काव्योचित तरीके से व्यंजित कर देती है।
ध्रुव शुक्ल की कविताई का एक वैशिष्ट्य इस बात में भी है कि वह हमारी काव्य-स्मृति में बसे कुछ पद-विन्यासों और लयात्मक स्मृति के माध्यम से, जिसमें हिन्दी के अपने पारम्परिक लय-विन्यासों तथा उर्दू ग़ज़ल की बहर का भी योगदान है, अपने समयसम्भव काव्यानुभव को एक कालातीत आयाम में प्रतिष्ठित करने का उपक्रम करती दिखाई देती है और इस तरह समय के साथ अपने काव्यानुभव का भी तत्त्वान्तरण करना चाहती है। वह सभी तरह के काव्य-संस्कारों को अपनी तरह से बरतती और वह सत्य बरामद करना चाहती है, जो कविता का अपना कमाया हुआ सत्य होता है।
– नन्दकिशोर आचार्य


 

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Description

KHALI HANTHON SI YEH KAYA (Poems) by Dhruv Shukla


About the Author

ध्रुव शुक्ल
मध्यप्रदेश के सागर शहर में 11 मार्च 1953 को जन्में कवि-कथाकार ध्रुव शुक्ल आधी सदी से हिन्दी समाज और उसकी साहित्यिक बिरादरी में शामिल हैं। उनकी कविता पुस्तकों में सात कविता संग्रह- खोजो तो बेटी पापा कहाँ हैं, फिर वह कविता वही कहानी, एक बूँद का बादल, सुनो भारत, दिनांक में बचा रह गया समय, चाँद मिटता नहीं मिटाने से (शायरी), हम ही हम में खेलें, और फूल पढ़ रहे हैं (बच्चों के लिए)। कहानी संग्रह-हिचकी, और एक लम्बी कहानी- अलफतिया। तीन उपन्यास-उसी शहर में, अमर टॉकीज, और कचरा बाजार। कृति केन्द्रित समीक्षा पुस्तक- ध्रुव शुक्ल की ईक्षा। सामयिक विषयों पर निबन्ध – एक नागरिक की डायरी और जनता की आलोचना। सान्निध्य का स्मृति लेखा- हम जो समझा किये – प्रकाशित।

महात्मा गांधी की पुस्तक ‘हिन्द स्वराज्य’ पर केन्द्रित-पूज्य पिता के सहज सत्य पर, संगीतकार पण्डित कुमार गन्धर्व की जीवनी- वा घर सबसे न्यारा,
कवि-संस्कृतिकर्मी अशोक वाजपेयी पर एकाग्र पुस्तक वह छंद की आवृत्ति-सा-के अलावा मध्यप्रदेश के लोक आख्यान, आदिवासी संस्कृति और भीलों के मदनोत्सव भगोरिया पर मोनोग्राफ लेखन। ध्रुव शुक्ल का एक रचना संचयन- यह दिन सब पर उगा है-भी प्रकाशित। ओड़िया भाषा में कविताओं के अनुवाद की एक पुस्तक भी लोकार्पित। उनके द्वारा कवि त्रिलोचन और लोककवि पिता माधव शुक्ल मनोज के रचना संचयन का सम्पादन।
रंगकर्मी ब.व. कारन्त द्वारा बुन्देली बोली में निर्देशित कालिदास के मालविकाग्निमित्र और बर्तोल्त ब्रेख्त के इंसाफ़ का घेरा नाटकों में बुन्देली लोकगीत और धुनों का संयोजन। रूपमति-बाजबहादुर प्रसंग पर आधारित कथक नृत्य के लिए गीत लेखन। हिन्दी में पहली बार रामचरितमानस पर आधारित जल सत्याग्रह कथा की अनेक सार्वजनिक प्रस्तुति। इस प्रवचन का कथा रूप-हनुमान की जुबानी छोटी राम कहानी-एक लघु पुस्तिका में प्रकाशित। भक्तिगीत रामबोला और अपनी ग़ज़लों की दो सीडीज़ का निर्माण।
भारत के राष्ट्रपति ने कथा अवार्ड से, गांधी शान्ति प्रतिष्ठान ने गांधी पीस अवार्ड फॉर लिटरेचर से, अमर उजाला समाचार समूह ने संगीतकार कुमार गन्धर्व की जीवनी पर छाप सम्मान से, राष्ट्रीय कृष्ण बलदेव वैद सम्मान से, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मारक समिति के लोकसेवा सम्मान से, मध्यप्रदेश लेखक संघ के अक्षर आदित्य सम्मान से, मध्यप्रदेश कला परिषद के रज़ा पुरस्कार से सम्मानित। भारत सरकार के संस्कृति विभाग और रज़ा फाउण्डेशन, दिल्ली से लेखन के लिए फैलोशिप।
ध्रुव शुक्ल मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के सचिव और साक्षात्कार पत्रिका के सम्पादक भी रहे। भोपाल में स्थापित कलाओं के घर भारत भवन और अलाउद्दीन खाँ संगीत अकादेमी से भी सम्बद्ध रहे। उन्होंने अशोक वाजपेयी द्वारा सम्पादित पूर्वग्रह पत्रिका में सह-सम्पादक की भूमिका भी निभायी। कवि त्रिलोचन पर- उस जनपद का कवि और कवि-संस्कृतिकर्मी अशोक वाजपेयी पर-थोड़ी-सी जगह- फिल्मों का निर्माण भी किया। वे भोपाल में स्थापित धर्मपाल शोधपीठ के निदेशक भी रहे। भोपाल में रहते हैं।


Additional information

Author

Dhruv Shukla

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-052-0

Pages

174

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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