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SALIB PAR NAGRIKTA (Poems) by Javed Alam Khan

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सलीब पर नागरिकता – जावेद आलम खान


युवा कवि जावेद आलम खान के संग्रह ‘सलीब पर नागरिकता’ की कविताओं को पढ़ते हुए हम एक दबी हुई चीख को, एक भिंचे हुए रुदन को, एक संयमित गुस्से को और असहाय अक्षम बनायी जा रही नागरिकता के विक्षोभ को बिल्कुल अपनी रगों पर महसूस कर सकते हैं। इन कविताओं में वह भारतीय समय बोलता है जिसकी विडम्बनाएँ अपने कमज़ोर और अल्पसंख्यक लोगों पर चाबुक की तरह पड़ती हैं और जिनकी उफ़ और चीख को बेमानी शिकायत की तरह दर्ज करती हैं। कवि इस बात की भी शिनाख्त करता है कि पहचानों के नाम पर की जा रही इस राजनीति में दक्षिण और वाम दोनों को अल्पसंख्यकों के इस्तेमाल से मतलब है। यह बिल्कुल इस समय की कविता है जिसे पढ़ना जरूरी है- ताकि याद रखा जा सके कि हमारे चारों तरफ़ कितनी बारीकी से अन्याय का कारोबार बढ़ाया जा रहा है, कितनी चालाकी से हत्याओं को छुपाया जा रहा है- कई बार ये कविताएँ अतिरिक्त तीखी जान पड़ती हैं- लेकिन क्या हमारे समय का यथार्थ ही इतना विरूप नहीं हो चुका है जिसे पकड़ने में सामान्य-सरल भाषा लगभग नाकाम हो चुकी है ?
हालाँकि इन कविताओं का केन्द्रीय स्वर भले मौजूदा समय के अन्यायों से पैदा विक्षोभ है, लेकिन इनमें जिंदगी के अलग-अलग रंगों और चाहतों के ढेर सारे निशान हैं। कहीं प्रेम, कहीं बेचैनी, कहीं स्वप्न, कहीं स्मृति इन कविताओं के निर्माण में लगती है। ये ठेठ और ठोस राजनीतिक कविताएँ हैं लेकिन इनके आशय राजनीति की हदों के आगे जाकर मनुष्यता का मर्म और पता मालूम करने की जद्दोजहद में दीखते हैं। इन कविताओं को पढ़ना अपने भीतर के उस आदमी को फिर से खोजना है जो आज की चमक-दमक में खो गया है, उस क्रूर और भेदभाव भरी व्यवस्था को फिर से पहचानना है जो बहुत लुभावने कपड़ों में और बड़ी सधी हुई भाषा में ख़ुद को छुपाये रखती है और अन्ततः उस कविता को फिर से अर्जित करना है जो इस बंजर होते समय में प्रतिरोध और उम्मीद के बीज बो सके।
– प्रियदर्शन


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Description

SALIB PAR NAGRIKTA (Poems) by Javed Alam Khan


About The Author

जावेद आलम ख़ान
जन्म : 15 मार्च 1980 को जलालाबाद, शाहजहाँपुर (उ.प्र.)।
शिक्षा : एम.ए. हिन्दी, एम.एड, नेट (हिन्दी)। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में तथा वेब पोर्टलों पर रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। इससे पहले एक कविता संग्रह ‘स्याह वक़्त की इबारतें’ नाम से प्रकाशित ।
सम्प्रति : शिक्षा निदेशालय दिल्ली के अधीन
टीजीटी हिन्दी।


SALIB PAR NAGRIKTA (Poems) by Javed Alam Khan

Additional information

Author

Javed Alam Khan

Binding

Paperback

Language

Hindi

Pages

160

ISBN

978-93-6201-922-6

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

3 reviews for SALIB PAR NAGRIKTA (Poems) by Javed Alam Khan

  1. Sohail alam khan

    Wow! Such a beautiful collection…
    Sometimes I got flaggerbasted with the language and style of the poet…
    Really love it…

  2. MOHD AZAM KHAN

    यह कविता-संग्रह भावनाओं की गहराई और शब्दों की सुंदरता का अद्भुत संगम है। हर कविता दिल को छूने वाली है और जीवन के विभिन्न पहलुओं को सरल लेकिन प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और संवेदनशील है, जो पाठक को अंत तक बाँधे रखती है। यह पुस्तक कविता-प्रेमियों के लिए एक अनमोल उपहार है।
    सभी कविता पाठक इस किताब को एक बार् खरीद कर जरूर पढ़े।

  3. Shiv kushwaha

    जावेद आलम खान का काव्य संग्रह ‘सलीब पर नागरिकता’ नई कविता की उस चेतना को जीवित रखता है जो मनुष्य को किसी भी प्रकार के अधिनायकवाद के सामने झुकने से रोकती है। नई कविता के ‘टूल्स’ (बिंब, प्रतीक, विडंबना और यथार्थवाद) का उपयोग करके कवि ने समकालीन भारत का एक ऐसा प्रामाणिक और जीवंत दस्तावेज़ तैयार किया है, जिसे आने वाले समय में इस दौर की बेचैनी के इतिहास के रूप में पढ़ा जाएगा। यह संग्रह हिंदी कविता की जनवादी और प्रगतिशील परंपरा की एक बेहद मजबूत कड़ी है।
    डॉ शिव कुशवाहा

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