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LAMBI LADAI (Poems) by Pankaj Chaudhary

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लम्बी लड़ाई (कविताएँ)  –  पंकज चौधरी


एक प्रवाह ऐसा भी बह रहा है जहाँ ‘जाति के प्रश्न’ महत्त्वपूर्ण स्थान रख रहे हैं। ऐसे कवियों में पंकज चौधरी का नाम सबसे पहले लिया जाना चाहिए। वे किसी की तरफ से या किसी जाति के प्रति दुराग्रह से भरकर इन प्रश्नों को नहीं उठाते। जातिवाद के विरुद्ध सच्ची कविता के रूप में पंकज चौधरी के लेखन को रेखांकित किया जाना चाहिए। मेरे खयाल से ‘जाति के प्रश्न’ को हिन्दी कविता का व्यापक प्रश्न बनाने वाले वे सबसे महत्त्वपूर्ण कवियों में एक हैं। पंकज जोखिम उठाकर अपने विमर्श को दूसरे विमर्श से टकराते भी हैं।
पंकज चौधरी पर्दे के पीछे से नहीं बोलते हैं। मंच-प्रिय भाषा भी उनके पास नहीं है। वे ‘नये युग के शत्रुओं’ की पहचान इंसाफ-पसन्दगी की बुनियाद पर करते हैं। वे ब्राह्मणवाद और बहुजनवाद के जातिवादी स्वरूप को समान रूप से ख़तरनाक मानते हैं, मगर वर्चस्वशाली जातियों के जातिवादी व्यूहों पर ज्यादा प्रहार करते हैं। यह उचित भी है।
पिछले पाँच-सात वर्षों में जो बुरे बदलाव हुए हैं उनकी दुर्गन्ध भी पंकज की काव्य-पीड़ा है। समय-सजग मन से उस पीड़ा को देखिएगा तो उसमें मनुष्यता के नष्ट होने की करुण चिन्ता महसूस होगी! महामारी के दौर में आसमानी कारस्तानियों और सुल्तानी नाकामियों ने जो मंजर दिखाये वे बहुआयामी थे। आपदा मुट्ठी भर लोगों के लिए सम्पदा बनकर आयी और जन-गण-मन के लिए तरह-तरह की विपदा ! तन-मन-धन के ध्वस्त होने पर कविता की करुणा हृदय का आहार बन जाती है। इस संग्रह की कुछ कविताएँ ऐसी ही हैं!
इक्कीसवीं शताब्दी में परिपक्व हुए कवियों की आँखों के सामने भौतिक विकास और प्राकृतिक विनाश के जितने दृश्य आ रहे हैं वैसे पहले नहीं आए थे। धर्मनिरपेक्ष राजनीति फिलहाल विफल दीख रही है और लोकतन्त्र पर पूँजीतन्त्र हावी हो चुका है। पब्लिक की जगह प्राइवेट को सत्ता का समर्थन मिल रहा है। अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति संगठित रूप से नफरत फैलायी जा रही है। इन सब दारुण सच्चाइयों ने इधर के कवियों की काव्य-वस्तु और शैली को प्रभावित किया है। पंकज चौधरी की कविताएँ इस दौर की साहसिक और ईमानदार गवाही देती हैं!
पंकज की काव्य-भाषा कुछ ज्यादा ही स्पष्ट मालूम पड़ती है। काव्य-भाषा के रूप में अस्वीकृत हो जाने का ख़तरा उठाते हुए वह अपनी यात्रा तय करती है। मंजिल की तरफ बढ़ती हुई उनकी भाषा व्यंजना और तात्पर्य की सम्पन्नता के कारण सार्थकता का एहसास कराती है।
– कमलेश वर्मा


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Description

LAMBI LADAI (Poems) by Pankaj Chaudhary


About The Author

पंकज चौधरी
जन्म : 15 जुलाई 1976, बिहार के सुपौल जिले के कर्णपुर गाँव में। पंकज की कविताएँ हिन्दी की लगभग सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। आपके दो अन्य कविता-संग्रह ‘उस देश की कथा’ और ‘किस किस से लड़ोगे’ नाम से प्रकाशित हैं। आपने वैचारिक आलेखों की दो पुस्तक ‘आंबेडकर का न्याय दर्शन’ और ‘पिछड़ा वर्ग’ का सम्पादन भी किया है। आपकी कई कविताएँ अँग्रेजी, मराठी, बांग्ला, गुजराती और मैथिली में अनूदित हो चुकी हैं। आप बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् के ‘युवा साहित्यकार सम्मान’, पटना पुस्तक मेला के ‘विद्यापति सम्मान’, प्रलेसं के ‘कवि कन्हैया स्मृति सम्मान’ और ‘नयी धारा रचना सम्मान’ से सम्मानित हैं।


LAMBI LADAI (Poems) by Pankaj Chaudhary

Additional information

Author

Pankaj Chaudhary

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-811-3

Pages

112

Publication date

01-02-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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