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Vaishvikaran, Asmitavad Aur Hindi Sahitya (Criticism) by Ravikant

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वैश्वीकरण, अस्मितावाद और हिन्दी साहित्य — रविकान्त


विचारधारा का अन्त और पुनः इतिहास का अन्त; ये उत्तर-आधुनिक समय की दो विचारोत्तेजक उ‌द्घोषणाएँ हैं। इससे वैश्विक स्तर पर अमेरिका और पूँजीवादी व्यवस्था का वर्चस्व स्थापित हो गया। इस विश्वव्यवस्था का स्वयंभू निर्माता और नियन्ता अमेरिका बना। इसे नव-उपनिवेशवाद भी कहा गया। यूरोपीय रेनेसाँ के उपरान्त उभरे औद्योगिक पूँजीवाद ने तीसरी दुनिया के देशों को उपनिवेश बनाकर प्रत्यक्ष साम्राज्य स्थापित किया था। लेकिन अमेरिकी नेतृत्व वाले वैश्वीकरण ने एकल संस्कृति के जरिए नव-उपनिवेशवाद को स्थापित किया। उदारीकरण की प्रक्रिया ने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की तीसरी दुनिया के देशों में अमेरिकी उत्पादन की खपत के लिए उपभोक्ता संस्कृति को प्रोत्साहित किया। वैश्वीकरण की प्रतिक्रिया में तीसरी दुनिया के देशों में राष्ट्रीय और सामुदायिक अस्मिताओं का उभार हुआ। हालाँकि कुछ विद्वानों का मानना है कि सामुदायिक अस्मिताओं को उभारने में अमेरिकी साम्राज्यवादी व्यवस्था ने प्रत्यक्षतः मदद की। इसीलिए सामुदायिक अस्मिताओं को उत्तर-आधुनिक विचारों का सह-उत्पाद माना जाता है।

– इसी पुस्तक से


 

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Description

Vaishvikaran, Asmitavad Aur Hindi Sahitya (Criticism) by Ravikant


कार्ल मार्क्स के अनुसार बदलते समाज के साथ साहित्य भी बदलता है। सामाजिक संरचना और जीवन मूल्यों के बदलने पर साहित्य की अन्तर्वस्तु और उसका स्वरूप भी बदलता है। 1990 का दशक भारतीय समाज में बड़े परिवर्तन का साक्षी बना। इस दौर में तीन बड़ी सामाजिक परिघटनाएँ सामने आती हैं। एक ओर, आर्थिक उदारीकरण ने वैश्वीकरण के लिए दरवाजे खोले। दूसरी ओर, हिन्दुत्ववादी साम्प्रदायिक राजनीति ने सदियों के ऐतिहासिक हिन्दू-मुस्लिम रिश्तों को दूषित किया। तीसरी बड़ी परिघटना हाशिये के साहित्यिक विमर्श की है। इस दौर में बढ़ती चेतना के साथ स्त्रियों और दलितों ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की।… इस पुस्तक में पिछले करीब एक दशक में लिखे गये लेख शामिल हैं। इसके अधिकांश लेख समयान्तर, वागर्थ, वसुधा और कथाक्रम जैसी पत्रिकाओं में पूर्व प्रकाशित हैं। इसलिए इनमें विषयों की विविधता है। लेकिन हमारे समय के प्रश्न और चुनौतियों को इन लेखों में देखा जा सकता है।
– भूमिका से


Vaishvikaran, Asmitavad Aur Hindi Sahitya (Critisim)

Additional information

Author

Ravikant

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-019-3

Pages

264

Publication date

08-09-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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