-20.07%

Lahooluhan Kashmir Aur Tadapti Kashmiriyat by Ram Puniyani

Original price was: ₹299.00.Current price is: ₹239.00.

लहूलुहान कश्मीर और तड़पती कश्मीरियत – राम पुनियानी

सम्पादक रविकान्त


केन्द्र में गठबन्धन सरकारों का दौर था। शेख अब्दुल्ला की मृत्यु के बाद कश्मीर को एकजुट रखने वाला कोई सक्षम नेता भी मौजूद नहीं था। 1990-91 में आतंकवाद का खुला तांडव हुआ। । केन्द्र में वीपी सिंह की सरकार थी जिसे भाजपा का समर्थन प्राप्त था। जगमोहन कश्मीर के राज्यपाल बने। इसी समय आतंकवादियों ने कश्मीरी पण्डितों पर हमला किया। जगमोहन के रहते हुए कश्मीरी पण्डितों को कश्मीर से पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यही जगमोहन बाद में भाजपा में शामिल होकर अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में मन्त्री बने। कश्मीरी पण्डितों के पलायन का भाजपा ने जमकर दुष्प्रचार किया। कश्मीरी पण्डितों के पलायन का ठीकरा काँग्रेस के सिर फोड़ा जबकि उस समय ना केन्द्र और ना ही कश्मीर में काँग्रेस का शासन था। आरएसएस की प्रोपोगेंडा मशीनरी की यही ताकत है। कौन कहता है कि झूठ के पाँव नहीं होते! दुनिया में झूठ का सबसे बड़ा तन्त्र आरएसएस के पास है। लेकिन काँग्रेस इस झूठ को बेपर्दा करने में नाकाम रही। इसका फायदा भाजपा को मिला। कश्मीर और मुसलमानों के खिलाफ नफरत पैदा करके भाजपा ने हिन्दू बहुसंख्यकवाद की राजनीति को मजबूत किया। इसके जरिए आरएसएस और भाजपा हिन्दू सवर्ण जातियों को गोलबन्द करने में कामयाब हो गये। कभी काँग्रेस का आधार रहा उत्तर भारतीय ब्राह्मण, कश्मीरी पण्डितों के मुद्दे पर भाजपा के साथ चला गया।
– भूमिका से


पुस्तक खरीदने के लिए नीचे दिए गए RazorPay बटन का प्रयोग भी किया जा सकता है

In stock

SKU: Lahooluhan Kashmir Aur Tadapti Kashmiriyat -PB Category:

Description

Lahooluhan Kashmir Aur Tadapti Kashmiriyat by Ram Puniyani (Edited by Ravikant)

राम पुनियानी

जन बुद्धिजीवी, लोकप्रिय वक्ता, इतिहास और समकालीन राजनीति के अध्येता, धर्मनिरपेक्षता और समाज अध्ययन केन्द्र के अध्यक्ष, साम्प्रदायिक सद्भावना और राष्ट्रीय एकता के लिए निरन्तर लेखन एवं सक्रियता, अनेक किताबों के लेखक, जैसे- साम्प्रदायिक राजनीति (2002), गांधी की दूसरी बार हत्या (2003), जाति और साम्प्रदायिकता (2015), अंबेडकर और हिन्दुत्व की राजनीति (2016), हिंसा-साम्प्रदायिकता (2021), भारतीय राष्ट्रवाद बनाम हिन्दू राष्ट्रवाद (2021), अंबेडकर, दलित और स्त्री प्रश्न (2023), वैश्विक आतंकवाद और भारत की अस्मिता (2024), आरएसएस और हिन्दुत्व की राजनीति (2024), खतरे में धर्मनिरपेक्षता (2025) Religious Nationalism, Social Perception and Violence (2021)। सम्मान : इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय एकता अवार्ड (2006), राष्ट्रीय एकता अवार्ड (2007)

रविकान्त (सम्पादक)

अंबेडकरवादी विचारक, राजनीतिक विश्लेषक, दलित मामलों के विशेष जानकार, साहित्य- समीक्षक, सामाजिक न्याय और साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए निरन्तर लेखन एवं सक्रियता, कई किताबों के लेखक और सम्पादक, जैसे-आलोचना और समाज (2016), आज के आईने में राष्ट्रवाद (2018), आजादी और राष्ट्रवाद (2018), ‘आधा गाँव’ में मुस्लिम अस्मिता (2019), वैश्वीकरण, हिन्दी साहित्य और आलोचना (2020), इतिहास, धर्म और राजनीति (2020), अंबेडकर, दलित और स्त्री प्रश्न (2023), अद्यतन हिन्दी काव्य (2023), प्रतिनिधि कविताएँ ओमप्रकाश वाल्मीकि (2024), सम्पूर्ण कविताएँ : ओमप्रकाश वाल्मीकि (2024), वैश्विक आतंकवाद और भारत की अस्मिता (2024), आरएसएस और हिन्दुत्व की राजनीति (2024), खतरे में धर्मनिरपेक्षता (2025)। पत्रिका सम्पादन : अदहन सम्प्रति : एसोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी तथा आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ।


Lahuluhan Kashmir Aur Tadapti Kashmiriyat

Additional information

Author

Ram Puniyani

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-700-0

Pages

190

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Lahooluhan Kashmir Aur Tadapti Kashmiriyat by Ram Puniyani”

You may also like…

0
YOUR CART
  • No products in the cart.