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PRITHVI KO CHANDRAMA (A Collection of Stories) by Anand Harshul

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पृथ्वी को चन्द्रमा – आनंद हर्षुल


‘पृथ्वी को चन्द्रमा’ की कहानियाँ एक ऐसे मिजाज, एक ऐसी प्रतिभा और प्रवीणता लिये हुए रचनाकार की कहानियाँ हैं जो जीवन और जगत् को अच्छी तरह देखने, या कहें कि नजदीक से देखने की लेखकीय क्षमता से लैस रचनाकार है। मानवीय जीवन को समूची सृष्टि के परिप्रेक्ष्य में, गहराई और सच्चाई से देखने की यह क्षमता ही है जो इन नौ कहानियों के ग्रेस, सौन्दर्य और निजता को उभारती है। इन सभी कहानियों में अपने ढंग की स्थिरता है, अपने ढंग का प्रवाह भी।
इन कहानियों के परिवेश, पात्रों, सरोकारों और तनावों से गुजरते हुए, हम मानवीय जीवन और मानवीय आत्मा की बाबत आनन्द हर्षुल के सच्चे और गम्भीर अवलोकन को देख पाते हैं। इनके गद्य में, इनके मानवीय अनुभवों में, ना कोई समझौता, ना संकीर्णता, ना शार्टकट है- यहाँ लेखकीय जिम्मेदारियाँ हैं, कलात्मक जोखिम और कलात्मक अन्तर्दृष्टि है।
इन कहानियों में, आनन्द हर्षुल द्वारा कायम और सम्भव की जा रही कलात्मक दूरी, अपने पाठक को यह भी बताती रहती है कि एक सच्ची कहानी का लिखा जाना, कहानी की विधा के विकास में सहायक तो है ही, वह कहानी की बरसों से चली आ रही परम्परागत रूढ़ियों का अतिक्रमण भी है।
‘पृथ्वी को चन्द्रमा’ की कुछ कहानियों में आकाश, पहाड़, पेड़, परिन्दों, जानवरों, नदी, मिट्टी और हवा जैसी नैसर्गिक ‘चीजों’ की उपस्थितियाँ, आनंद हर्षुल को सिर्फ संसार के लिए ही चिन्तित रहते हुए, अपना मानवीय सरोकार जताते हुए लेखक में नहीं, समूची सृष्टि को अपनी चिन्ताओं के केन्द्र में रखने वाले लेखक के रूप में बदलती हैं। पर इन सबके साथ-साथ इन कहानियों में एक खास किस्म की स्थानीयता का गहरा बोध भी रचा-बसा रहता है। यहाँ स्थानीयता है, संकीर्णता नहीं है। अपनी तरह का परिवेश-बोध है, जहाँ छत्तीसगढ़ का भूगोल, छत्तीसगढ़ का जनजीवन, छत्तीसगढ़ का इतिहास मँडराता रहता है।
आनंद हर्षुल के भीतर का रचनाकार, अपने नैतिक आवेगों के साथ-साथ भाषा, तकनीक और संरचना के प्रति अपनी सहज संवेदनशीलता और गम्भीरता से भी, हम पाठकों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
— जयशंकर


 

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Description

PRITHVI KO CHANDRAMA (A Collection of Stories) by Anand Harshul


About The Author

आनंद हर्षुल
आनंद हर्षुल (जन्म 23 जनवरी 1959) के यहाँ यथार्थ अनवरुद्ध गति में बहता स्वच्छन्द यथार्थ है। दरअसल यथार्थ की इस तरल उठान को एक क़िस्म की स्वैर वृत्ति निरन्तर यत्नपूर्वक साधे रखती है। इस प्रक्रिया में कथा-भाषा का विनियोग इस कौशल के साथ किया गया है कि कथा-संवेदना अपनी गतिशील चित्रात्मकता में अपना विन्यास प्राप्त करती है। उनके पाँच कहानी संग्रह-बैठे हुए हाथी के भीतर लड़का’, ‘पृथ्वी को चन्द्रमा’, ‘रेगिस्तान में झील’, ‘अधखाया फल’, ‘चिड़िया और मुस्कुराहट’ तथा तीन उपन्यास ‘चिड़िया बहनों का भाई’, ‘देखना’ एवं ‘रेतीला’ तथा एक सम्पादित पुस्तक, ‘अनगिन से निकलकर एक’ अब तक प्रकाशित हैं। उनकी रचनाओं का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हुआ है। वे ‘सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार’ (1997), ‘विजय वर्मा अखिल भारतीय कथा सम्मान’ (2003), ‘वनमाली कथा सम्मान’ (2014) तथा संस्कृति मन्त्रालय, भारत सरकार की सीनियर फेलोशिप (2020-21) से सम्मानित हैं।


PRITHVI KO CHANDRAMA (A Collection of Stories) by Anand Harshul

Additional information

Author

Anand Harshul

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-110-7

Pages

152

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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