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JUST CHILL YAAR (Novel) by Rajani Gupta

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जस्ट चिल यार – रजनी गुप्त


यह उपन्यास पुराने और नये समय की टकराहट की कहानी कहता है। कुछ मायने में आज के कुछ पति अभी भी पत्नी और उसकी देह को अपनी सम्पत्ति समझते हैं, उच्च शिक्षा और सम्पन्नता के बाद भी उनके सामन्तवादी विचार बदले नहीं हैं। यह एक आधुनिक, उच्च शिक्षित स्त्री, मानसी, की कहानी है, जिसने आर्थिक समस्याओं और परिवार के सुख के लिए उन्नीस वर्ष की आयु में एक सम्पन्न पुरुष से विवाह कर लिया है। विवाह के बाद भी उसमें आगे बढ़ते रहने की तीव्र इच्छा है, और वह आगे बढ़ती भी रहती है और यहीं से प्रारम्भ होती है उसके जीवन की विसंगतियाँ।
अन्त में उनका डिवॉर्स हो जाता है और उसके बाद वह जीवन के तमाम पहलुओं का निरीक्षण करती है, घटनाएँ वही हैं, चाहे उसके जीवन की या उसके तहत काम करने वाली अन्य स्त्रियों की। सब आर्थिक रूप से स्वतन्त्र, परन्तु किसी न किसी पुरुष के प्यार में पहले तृप्ति फिर किसी न किसी प्रकार से धोखा खाने वाली। कुछ टूट जाती हैं, कुछ गिरकर फिर सँभल जाती हैं, मगर हरेक को यही कामना है, सन्तुष्टि और तृप्ति की जो आज के पुरुष, पारम्परिक विचार में बँधे मगर नये विचारों के कारण उन्मुक्त। आजकल का आधुनिक समाज, चाहे स्त्रियाँ हों या पुरुष, घर से दूर, काम करके अच्छा अर्जित करते हुए भी किस सम्बन्ध की कामना कर रहे हैं, यह वह स्वयं नहीं जानते। मानसी के सान्निध्य की कामना करते हुए अनेक पुरुष हैं, उसने भी प्यार किया है, परन्तु आज का मूल मन्त्र यही है, जस्ट चिल यार। रजनी गुप्त की भाषा जगह-जगह कवित्वमय हो गयी है, उसमें रवानगी और बहाव है जिसके कारण पाठक कहानी के साथ-साथ चलता रहता है। लेखिका में आज के विभ्रमित नवयुवक और युवतियों की मानसिक और शारीरिक जरूरतों को पहचानने की अपूर्व क्षमता है, और लगता है कि जिस समाज और तबके का वह वर्णन कर रही हैं, उसका मूल मन्त्र बन गया है, जस्ट चिल यार।
– उषा प्रियंवदा (वरिष्ठ कथाकार)


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Description

JUST CHILL YAAR (Novel) by Rajani Gupta

About The Author

रजनी गुप्त
जन्म : 02-04-1963 चिरगाँव, झाँसी, उ.प्र. ।
शिक्षा : एम.फिल. पी-एच.डी.; जे.एन.यू. नयी दिल्ली।
प्रकाशित पुस्तकें : उपन्यास-10; कहानी संग्रह-9;
आलोचनात्मक पुस्तकें-3; तीन पुस्तकों का सम्पादन; ‘स्त्री घर’ (डायरी विधा) औरंगाबाद विश्वविद्यालय के बी.ए. के पाठ्यक्रम में शामिल। इसी पुस्तक में संकलित ‘मेरी कहानी’ का अँग्रेजी रूपान्तर ह्वेयर इज माई होम (साहित्य अकादेमी द्वारा प्रकाशित )
पुरस्कार/सम्मान: युवा लेखन सर्जना पुरस्कार; आर्य
स्मृति साहित्य सम्मान (किताबघर प्रकाशन); ‘किशोरी का आसमाँ’ पर अमृतलाल नागर पुरस्कार; ‘अस्ताचल की धूप’ कहानी संग्रह पर रावी स्मृति सम्मान; ‘कितने कठघरे’ पर महादेवी वर्मा अवॉर्ड; साहित्यश्री सम्मान-साहित्यिक संघ वाराणसी; ‘तिराहे पर तीन’ उपन्यास पर शिक्षाविद् पृथ्वीनाथ भान साहित्य सम्मान; साहित्य समर्था पत्रिका की अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता में दूसरा सम्मान; ‘सतह पर चाँद’ कहानी संग्रह हेतु भोपाल की स्पन्दन संस्था द्वारा स्पन्दन सम्मान।

Additional information

Author

Rajani Gupta

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-070-4

Pages

248

Publisher

Setu Prakashan Samuh

1 review for JUST CHILL YAAR (Novel) by Rajani Gupta

  1. Chavvi Kumar

    उपन्यास अच्छी भाषा का स्वाद देता है, बहुत सुंदर।

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