-20.03%

Swasti Rigved (Pratham Mandal) Se 112 Sukt-Translated by Mukund Lath

Original price was: ₹649.00.Current price is: ₹519.00.

स्वस्ति

ऋग्वेद (प्रथम मण्डल) से ११२ सूक्त

संस्कृत से अनुवाद मुकुन्द लाठ


इताली काल्वीनो ने कभी लिखा था कि क्लॅसिक वे ग्रन्य होते हैं जिनका जिक्र सभी करते हैं पर जिन्हें पढ़ता कोई नहीं है। यह बात हमारे एक क्लैसिक ऋग्वेद पर बखूबी लागू होती है। इधर ऐसे लोगों और संस्थाओं की संख्या बढ़ी है जो वैदिक ज्ञान, वैदिक सम्पदा, वैदिक परम्परा, वैदिक गणित आदि का जिक्र बहुत करते हैं लेकिन जिन्होंने कभी वेद पढ़े नहीं हैं। एक और लोकप्रिय मिथक यह भी है कि वेदों में सब कुछ है, कि सब कुछ वेदों से ही शुरू हुआ है और उसी में समाहित है। कुछ अनुष्ठानों आदि को भी जब-तब उनकी वैधता और प्रामाणिकता के लिए वेदों से जोड़ा जाता है। हालाँकि आदिकवि हमारे यहाँ वाल्मीकि को माना जाता है; वैदिक ऋषि, जिनमें कई ऋषिकाएँ और सम्भवतः आदिवासी ऋषि भी शामिल हैं. हमारे आदिकवि हैं क्योंकि वेद हमारा प्रथम काव्यग्रन्च है। इसका ताता प्रमाण यह है कि ऋग्वेद के प्रथम मण्डल के ११२ सूक्तों का कवि-विद्वान् मुकुन्द लाड द्वारा किया गया हिन्दी अनुवाद ‘स्वस्ति’ शीर्षक से रजा पुस्तक माला के अन्तर्गत सेतु प्रकाशन प्रकाशित कर रहा है। ऋग्वेद में स्तुति, आह्वान, आद्य-बिम्व आदि कविता के अनेक रूप है। लगता है कि यह कविता देवताओं और प्रकृति के पंच तत्वों से, ज्ञात-अज्ञात शक्तियों से समीपता, सहचारिता और सान्निध्य की कोशिश में लगी कविता है।
यह अलक्षित नहीं किया जा सकता कि एक वैदिक कवि विधाता से कहता है कि ‘यह जगत् काव्य है
तुम्हारा’। इस काव्य में पवित्रता और पदार्थमयता, पारलौकिकता और इहलौकिकता का, प्राकृतिक और दिव्य का जो संगुम्फन है वह उसे जो ऊँचाई और उज्यलता देता है वे अपनी ऊष्मा और आशय में बेहद मानवीय है। उसमें ‘प्रचमता’ का आत्मविश्वास और परिष्कार की निष्कलंक आभा दोनों साथ हैं। रजा फाउण्डेशन इस अनुवाद को प्रस्तुत करते हुए कृतज्ञता अनुभव करता है।
अशोक वाजपेयी


In stock

SKU: Swasti Rigved-PB Category:

Description

Swasti Rigved (Pratham Mandal) Se 112 Sukt-Translated by Mukund Lath


About The Author

मुकुन्द लाठ

जन्म: १९३७, कोलकाता में। शिक्षा के साथ
संगीत में विशेष प्रवृत्ति थी जो बनी रही। पण्डित जसराज के शिष्य। अँग्रेजी में बी.ए. (ऑनर्स), फिर संस्कृत में एम.ए. किया। पश्चिम बर्लिन गये और वहाँ संस्कृत के प्राचीन संगीत-ग्रन्थ दत्तिलम् का अनुवाद और विवेचन किया। भारत लौट कर इस काम को पूरा किया और इस पर पी-एच.डी. ली। १९७३ से १९९७ तक राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर, के भारतीय इतिहास एवं संस्कृति विभाग में रहे। यशदेव शल्य के साथ दर्शन प्रतिष्ठान की प्रतिष्ठित पत्रिका उन्मीलन का सम्पादन और उसमें नियमित लेखन ।
भारतीय संगीत, नृत्त, नाट्य, कला, साहित्य सम्बन्धी चिन्तन और इतिहास पर हिन्दी-अंग्रेजी में सोलह पुस्तकें और अनेक अनूदित पुस्तकों के अलावा दो कविता संग्रह।
प्रमुख सम्मान व पुरस्कार पद्मश्री, शंकर पुरस्कार, नरेश मेहता वाड्मय पुरस्कार, फेली-संगीत नाटक अकादेमी।
निधन: ६ अगस्त २०२०


Additional information

Translation

Mukund Lath

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-752-9

Pages

486

Publication date

29-07-2025

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Swasti Rigved (Pratham Mandal) Se 112 Sukt-Translated by Mukund Lath”

You may also like…

0
YOUR CART
  • No products in the cart.