Description
SALIB PAR NAGRIKTA (Poems) by Javed Alam Khan
About The Author
जावेद आलम ख़ान
जन्म : 15 मार्च 1980 को जलालाबाद, शाहजहाँपुर (उ.प्र.)।
शिक्षा : एम.ए. हिन्दी, एम.एड, नेट (हिन्दी)। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में तथा वेब पोर्टलों पर रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। इससे पहले एक कविता संग्रह ‘स्याह वक़्त की इबारतें’ नाम से प्रकाशित ।
सम्प्रति : शिक्षा निदेशालय दिल्ली के अधीन
टीजीटी हिन्दी।






























Sohail alam khan –
Wow! Such a beautiful collection…
Sometimes I got flaggerbasted with the language and style of the poet…
Really love it…
MOHD AZAM KHAN –
यह कविता-संग्रह भावनाओं की गहराई और शब्दों की सुंदरता का अद्भुत संगम है। हर कविता दिल को छूने वाली है और जीवन के विभिन्न पहलुओं को सरल लेकिन प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और संवेदनशील है, जो पाठक को अंत तक बाँधे रखती है। यह पुस्तक कविता-प्रेमियों के लिए एक अनमोल उपहार है।
सभी कविता पाठक इस किताब को एक बार् खरीद कर जरूर पढ़े।
Shiv kushwaha –
जावेद आलम खान का काव्य संग्रह ‘सलीब पर नागरिकता’ नई कविता की उस चेतना को जीवित रखता है जो मनुष्य को किसी भी प्रकार के अधिनायकवाद के सामने झुकने से रोकती है। नई कविता के ‘टूल्स’ (बिंब, प्रतीक, विडंबना और यथार्थवाद) का उपयोग करके कवि ने समकालीन भारत का एक ऐसा प्रामाणिक और जीवंत दस्तावेज़ तैयार किया है, जिसे आने वाले समय में इस दौर की बेचैनी के इतिहास के रूप में पढ़ा जाएगा। यह संग्रह हिंदी कविता की जनवादी और प्रगतिशील परंपरा की एक बेहद मजबूत कड़ी है।
डॉ शिव कुशवाहा