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Kiraye ka Ghar (Kavitayen Evam Kavya Natak) by Arun Kamal

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किराये का घर – अरुण कमल

(कविताएँ एवं काव्य नाटक)


सन् 80 के बाद जो कविता विकसित हुई, उसके सबसे प्रमुख कवियों में एक हैं- अरुण कमल। वरिष्ठ कवि अरुण कमल का यह आठवाँ संग्रह सिर्फ समय के इस बोध में नया संग्रह नहीं है कि सातवें के बाद आया है। यह सर्जनात्मक आयतन के विस्तार का साक्षी है। कविताओं के साथ काव्य-नाटक तथा ‘कौआ’ जैसी रचनाओं का होना उसका एक पक्ष है।
इसका दूसरा और उससे भी महत्त्वपूर्ण पक्ष यह है कि ये कविताएँ उनके काव्य-यात्रा के विकास का वाचक है। कविता में महीनी से उसके ‘मैं’ या स्वत्व का विकास हुआ है। ‘मैं’ अहं का वाचक नहीं, उसके विस्तार का वाचक है। यह विस्तार कविता मात्र में शब्द और अर्थ का सहित भाव निर्मित करता, जिससे काव्य बनता है-‘ शब्दार्थो सहितौ काव्यम्’। इस कारण ही ये कविताएँ अपनी काव्य-यात्रा से भी एक तरफ सम्बन्ध जोड़े रख पाती हैं तो दूसरी ओर व्यापक पाठक वर्ग से।
शब्दार्थों का सहित भाव अगर अरुण कमल की कविताओं की विशेषता है तो यह भी विशिष्ट अर्थ का बोधक है। शब्द जिस अनुभव, विचार, सन्दर्भ को ढोते हैं और किसी अर्थ बिन्दु तक संचरित करते हैं, वह इनकी कविताओं में सरल दीख सकता है, परन्तु उसका वाच्यार्थ सरल हो, यह आवश्यक नहीं। इसीलिए इनकी कविताओं में सामान्य से विशिष्ट पाठक वर्ग के लिए जुड़ाव के अवसर होते हैं।
काव्य-संसार का सारा व्यापार प्राथमिक और अन्तिम रूप से भाषा का परिसर है। इन कविताओं की भाषा सर्वग्राही तो है ही, साथ ही इसमें अर्थच्छटाओं का वैभव भी है। भाषा में व्यंग्य, हास्य, विद्रूप को इन्होंने अपने टूल्स के रूप में इस्तेमाल किया है।
इस संग्रह में एक काव्य नाटक भी है- प्रहसन – जहाँ भाषा का कौतुक देखते ही बनता है। यह प्रहसन विषय और भाषिक विधान दोनों स्तरों पर समकालीन जीवन की विद्रूपताओं की देन है।
– अमिताभ राय


 

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Description

Kiraye ka Ghar (Kavitayen Evam Kavya Natak) by Arun Kamal


About The Author

अरुण कमल

जन्म : 15 फरवरी 1954 को नासरीगंज (रोहतास) बिहार। कुल सात कविता संग्रह प्रकाशित। यह आठवाँ। चार कविता चयन और दो आलोचना पुस्तकें तथा साक्षात्कारों की एक किताब प्रकाशित ।
मायकोव्स्की की आत्मकथा सहित अनेक विदेशी कवियों के हिन्दी में अनुवाद प्रकाशित। भारतीय कविता का एक संकलन वॉयसेज नाम से अँग्रेजी में प्रकाशित। नागार्जुन, त्रिलोचन, शमशेर, केदारनाथ सिंह के अँग्रेजी अनुवाद तथा उनपर लेख प्रकाशित। मुक्तिबोध, केदारनाथ अग्रवाल के भी अनुवाद किये।
नवभारत टाइम्स (पटना), लिटरेट वर्ल्ड (यूएसए) और सकाल (पुणे) में कुछ समय के लिए स्तम्भ लेखन। प्रभात खबर (राँची) में ‘अनुस्वार’ नाम से कविता-अनुवाद का स्तम्भ भी चला। आलोचना पत्रिका के तीस अंकों का सम्पादन। एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तक सृजनात्मक लेखन और अनुवाद के भी सलाहकार रहे।
बच्चों के लिए निबन्धों की एक किताब हवामिठाई और एक छोटा उपन्यास एक चोर की चौदह रातेंप्रकाशित ।
कविता के लिए चतुरंग सम्मान, भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, सोवियत लैण्ड नेहरू पुरस्कार, श्रीकान्त वर्मा स्मृति पुरस्कार, शमशेर सम्मान, रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार; नये इलाके में कविता पुस्तक के लिए 1998 का साहित्य अकादेमी पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद् का समग्र कृतित्व सम्मान, नागार्जुन पुरस्कार, दिनकर सम्मान, अज्ञेय स्मृति सम्मान, कलिंग इण्टरनेशनल लिटरेचर अवार्ड और परिवार सृजन सम्मान। बाल साहित्य के लिए तक्षशिला फाउण्डेशन की वृत्ति।
अनेक देशों के साहित्य-कार्यक्रम में भागीदारी।
पटना विश्वविद्यालय के अँग्रेजी विभाग में अध्यापन के बाद सेवानिवृत्ति। पटने में निवास।


Additional information

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-863-2

Pages

104

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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