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NAQSHAKASHI (Poems) by Sarfaraz Aalam

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नक्शाकशी — सरफराज आलम


इस पृथ्वी पर बहुत विविधता है। दुनिया की इस विविधता को जानने और समझने की जिज्ञासा हम सब में है। इसलिए हममें से अधिकतर दुनिया की यात्रा करते रहे हैं। दुनिया की इस यात्रा में नक़्शे बहुत कारगर होते हैं। अनेक लोग नक़्शे का उपयोग दुनिया की यात्रा में करते रहे हैं। पर हममें से शायद ही किसी ने नक़्शे पर यात्रा की हो। नक़्शे पर हमारी यात्रा दुनिया की यात्रा से कम रोचक नहीं है। इस यात्रा के बारे में कुछ जरूरी सवाल हैं। नक़्शे पर यात्रा से क्या तात्पर्य है ? नक़्शे की यात्रा दुनिया की यात्रा से कैसे अलग है? और नक़्शे पर यात्रा कैसे हो ?
प्यार हर एक जीव की सबसे रोमांचकारी क्रिया है। प्रस्तुत कविताएँ नक़्शा बनाने और पढ़ने के बारे में हैं। नक़्शे की संस्कृति के बारे में हैं। नक़्शा बनाते हुए प्यार करने के बारे में हैं। नक़्शा पढ़ते हुए प्यार करने के बारे में हैं। ये कविताएँ, नक़्शा बनाते और पढ़ते हुए, प्यार के विभिन्न पड़ाव और यात्रा के बारे में हैं। इन कविताओं के ज़रिये, मैं आपको दुनिया के नक़्शे पर एक रोमांचकारी यात्रा पर ले जाना चाहता हूँ।
क्या नक्शा बनाकर (नक्शे से) प्यार का इजहार किया जा सकता है? यदि हाँ, तो वे नक़्शे कैसे बनेंगे ? उन नक्शों का नक्शा कैसा होगा? यानी, वे नक़्शे कैसे दिखेंगे ? क्या ऐसे नक्शों को बनाने के लिए अलग व्याकरण का प्रयोग होगा ?
मेरा मानना है कि दुनिया का नक़्शा बनाकर आप अपने प्यार का इजहार मुख्तलिफ़ ढंग से कर सकते हैं। इन कविताओं में ऐसे ही नक़्शों की रूप-रेखा दीखती है। ये कविताएँ आपको अलग तरह के नक़्शे बनाने के लिए सोचने पर आमादा करेंगी। ऐसे नक़्शे जो लोगों के बीच दूरियाँ और बाधा कम कर सकें। लोगों के बीच भाईचारा और प्यार फैला सकें। लोगों को एक-दूसरे से जोड़ सकें। मिसाल के तौर पर, ऐसे नक़्शों में लकीरें किसी जगह को तोड़तीं नहीं। अलहदा नहीं करतीं। बल्कि अलग-अलग जगहों को एकसाथ लाती हैं। उन्हें जोड़ती हैं। ऐसे नक़्शों के ज़रिये आप अपने से दूर रह रहे अपने प्रियतम से गुफ़्तगू कर सकते हैं। इसलिए नक़्शाकशी की दुनिया में एक नयी तरह की यात्रा पर आपका स्वागत है।
मेरा यह भी मानना है कि दुनिया के हर एक नक़्शे में मुहब्बत के मुख्तलिफ़ रंग भरे होते हैं। आप नक़्शे पर अपने प्रियतम को नये-नये रूप-रंग में देख सकते हैं। उनकी प्रेमपूर्ण उपस्थिति का अनुभव कर सकते हैं। उनसे गुफ़्तगू कर सकते हैं। यहाँ तक कि नक़्शे पर प्रियतम के साथ दुनिया की यात्रा भी कर सकते हैं। ये कविताएँ एक अनोखी और रोमांचकारी यात्रा पर आपका स्वागत करती हैं!
– प्रस्तावना से


 

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Description

NAQSHAKASHI (Poems) by Sarfaraz Aalam


About The Author

सरफ़राज़ आलम
जन्म : 5 जनवरी 1972; ग्राम: सरया अख्तियार, जिला गोपालगंज, बिहार।
शिक्षा : उच्चतर माध्यमिक और स्नातक (एएमयू, अलीगढ़)। भूगोल में एम.ए. और राजनीतिक भूगोल में एम.फिल., पी-एच.डी. (जेएनयू, दिल्ली)।
कृतियाँ : ‘नक्शानामा’ (कविता संग्रह, 2023)। राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर की शोध पत्रिकाओं और सम्पादित कित्ताबों में 80 से अधिक शोधपत्र। राजनीतिक भूगोल और भौगोलिक शिक्षा पर शोध के लिए राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति ।
पुरस्कार : बांग्लादेश पर शोध के लिए जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फण्ड (नयी दिल्ली) द्वारा जवाहरलाल नेहरू छात्रवृत्ति (2002)। शोध हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जूनियर एवं सीनियर रिसर्च फेलोशिप (1997)। अनेक देशों का अकाद‌मिक भ्रमण। देश और विदेश के प्रतिष्ठित भौगोलिक संस्थानों की सदस्यता।
शोध एवं शिक्षण : मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं सामरिक विश्लेषण संस्थान,
नयी दिल्ली में एक शोधकर्ता के रूप में कार्य। जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा और इग्नू, नयी दिल्ली में शिक्षक के रूप में कार्य। वर्तमान में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में आचार्य के पद पर कार्यरत।


नक्शाकशी — सरफराज आलम

Additional information

Author

Sarfaraz Aalam

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-886-1

Pages

206

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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