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NAKHUN Me FANSI MITTI (Poems) by Shankaranad

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नाखून में फँसी मिट्टी (कविता संग्रह) – शंकरानन्द


शंकरानंद की लिखाई में उनका समय सजगता से उपस्थित है। उनकी कवि दृष्टि उनको उनके समकालीन कवियों से अलग करती है। वे चुप रहने को कविता में निरर्थक मानते हैं लेकिन आवाज के मर्म को बखूबी समझते हैं। शंकरानंद के काव्य मर्म का मूल तंतु विकलता है। ऐसी विकलता जिसे दर्ज किए बिना कवि को किसी तरह की राहत नहीं मिलती। शंकरानंद की कविता चुपचाप एक प्राचीन हाहाकार को अपने हृदय में अंकित कर लेती है। अक्सर हम कविता को एक शब्द-बंध से अधिक नहीं देख पाते। यह कविता का अवमूल्यन है। प्रत्येक कविता एक जीवित इकाई होती है। उसकी अपनी संवेदना और आकांक्षा भी होती है। यह बात समझने और समझाने के लिए शंकरानंद की कई कविताएं एक उदाहरण हो सकती हैं। शंकरानंद अपने हाहाकार को हाहाकार की तरह नहीं कहते। वे सहते हुए कहते हैं। उनकी कविताएँ एक आम भारतीय की सहनशीलता का महाकाव्य हैं। इसके अनेक रंग हैं शंकरानंद के पास। अपनी नागरिक सोच और संवेदना को शंकरानंद बिना चीख पुकार के प्रकट करते हैं। मैं अनेक बार प्रतीक्षा करता हूँ कि अपनी कविता में शंकरानंद कब शोर मचाते हैं, लेकिन वे बिना शोर मचाए हाहाकार उठाते रहते हैं। ऐसा नहीं है कि वे अपनी कविता में फुसफुसाहट पर बल देते हैं। ऐसा भी नहीं है कि वे केवल संकेत करते हैं। नहीं, वे बोलते हैं, अपनी बात पर टिके रहते हैं, एक सहज सहल साधारण जल की तरह वे एकालाप की जगह गहराई तक जिरह में यकीन करते हैं और अपनी बात हर हाल में कहते हैं।
– बोधिसत्व

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Description

NAKHUN Me FANSI MITTI (Poems) by Shankaranad


About The Author

शंकरानंद
जन्म : 8 अक्टूबर 1983 को बिहार के खगड़िया जिले के एक गाँव हरिपुर में।
शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), बी.एड. ।
प्रकाशन : अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं तथा
पोर्टलों में कविताएँ प्रकाशित। कुछ में कहानियाँ भी। कोरोना काल की कविताओं सहित कई महत्त्वपूर्ण संकलनों के साथ ‘छठा युवा द्वादश’ और ‘समकालीन कविता’ में कविताएँ शामिल। पंजाबी, बांग्ला, मराठी, गुजराती, नेपाली और अँग्रेजी जैसी भाषाओं में कविताओं के अनुवाद भी। कविता संग्रह ‘दूसरे दिन के लिए’, ‘पदचाप के साथ’, ‘इनकार की भाषा’ और ‘जमीन अपनी जगह’ प्रकाशित। कविता के लिए विद्यापति पुरस्कार, राजस्थान पत्रिका का सृजनात्मक पुरस्कार और मलखान सिंह सिसौदिया कविता पुरस्कार प्राप्त ।
सम्प्रति : लेखन और अध्यापन।
सम्पर्क : क्रान्ति भवन, कृष्णा नगर, खगड़िया-851204 (बिहार)।


NAKHUN Me FANSI MITTI (Poems) by Shankaranad

Additional information

Author

Shankaranad

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-681-2

Pages

232

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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