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PREM DHRUPAD (Poems) by Leeladhar Mandloi

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प्रेम ध्रुपद — लीलाधर मंडलोई


कहना न होगा कि उल्लिखित पंक्तियों में आया हर सन्दर्भ एक आयाम है और कथ्य का एक दरवाज़ा खोल रहा है। इस मुक्त विहार में अनेकानेक सन्दर्भों से एक पर्यावरण रचा गया है जिसमें फैला हुआ कोई अनचीन्हा अवसाद है तो कहीं उम्मीद की एक बिखरी हुई ‘जैविक प्रेम गन्ध’ है। आलाप की एक लम्बी तान के आरोह अवरोह में फैला हुआ ज्ञात और अज्ञात का यह संसार। रचनाकार कहीं ठहरकर छूटी हुई घास की भीगी हुई सुगन्ध में दूब के बार-बार उगने को देखता है तो कहीं लहरों, बादलों, हवाओं और बारिश की रिमझिम में एक लय का साक्षात्कार करता है। दूसरी ओर चुप्पियों में छिपे हुए किसी क्लेश को सुनता है। वह एक बेमक़सद बीतते जीवन में दुख और सन्ताप के बीच प्रेम के अरूप की सर्जना है। अपने होने का कहीं कोई निर्वासन है तो कहीं पुनर्वास भी। कहीं एक शोकगीत तो कहीं स्थगित को बटोरने का समय। प्रयास और निरन्तरता, क्षरण और सातत्य की पारस्परिकता में जीवन की कोई सम्भावना जो अभी शेष है कहीं। फ़ैज़, बिरजू महाराज, सितारादेवी, बेगम अख्तर, पं. जसराज आदि यहाँ व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ नहीं हैं। वे अभिप्राय हैं। निर्बन्ध की किसी यात्रा से जुड़ने का सम्मोहन बन जाते हैं।
— विजय कुमार


 

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Description

PREM DHRUPAD (Poems) by Leeladhar Mandloi


About The Author

लीलाधर मंडलोई
जन्म : 15 अक्टूबर 1953, छिन्दवाड़ा के गाँव गुढ़ी में।
प्रमुख कविता संग्रह घर-घर घूमा, रात-बिरात, मगर की आवाज, काल बांका तिरछा, एक बहोत कोमल तान, महज़ शरीर नहीं पहन रखा था उसने, लिखे में दुख, मनवा बेपरवाह, भीजै दास कबीर और जलावतन, और, क्या बने बात। कविता चयन : देखा-अदेखा, 75 कविताएँ, कवि ने कहा और हत्यारे उतर चुके हैं क्षीरसागर में। उपस्थित है समुद्र (हिन्दी व रूसी भाषा में)।
अँग्रेज़ी, रूसी, बांग्ला, नेपाली, ओड़िया, मराठी, उर्दू, गुजराती और पंजाबी में कविताओं के अनुवाद प्रकाशित ।
डायरी : दाना पानी, दिनन-दिनन के फेर, राग सतपुड़ा
कविता डायरी-यादें, बसन्त की ख़ुशबुएँ हैं और ईश्वर कहीं नहीं। आलोचना कविता का तिर्यक। यात्रा-वृत्तान्त : काला पानी। निबन्ध : अर्थ जल और कवि का गद्य। अन्य : बच्चों के लिए तीन कथा-संग्रह। अनुवाद की तीन किताबें। दस सम्पादित किताबें।
प्रमुख सम्मान : कबीर, पुश्किन, रजा, नागार्जुन, शमशेर,
किशोरी अमोनकर, रामविलास शर्मा, वागीश्वरी, कृति, प्रमोद वर्मा, विष्णु खरे व साहित्यकार सम्मान। ‘नया ज्ञानोदय’ और वर्तमान में ‘विश्वरंग’ पत्रिका का सम्पादन।


 

Additional information

Author

Leeladhar Mandloi

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-217-3

Pages

151

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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