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RAMESHWAR PREM KE PRACHALIT NATAK by Rameshwar Prem
About The Author
रामेश्वर प्रेम
जन्म 3 अप्रैल 1943 को निर्मली, बिहार में हुआ। हिन्दी में स्नातकोत्तर और भारतीय दर्शन से स्नातक; 1969 में नागपुर के ‘नवभारत’ समाचार पत्र में सहायक सम्पादक के रूप में कार्य किया; 1971 में केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो में नियुक्ति हुई और 1976-79 के दौरान नागरिक उड्डयन विभाग, दमदम, कोलकाता में डेपुटेशन पर भी गये।
हिन्दी रंगमंच को एक लेखक के रूप में आपका योगदान उल्लेखनीय है अजातघर (1973, प्रथम
निर्देशन : राम गोपाल बजाज), राजा नंगा है (1975,
प्रथम निर्देशन : बंशी कौल), चारपाई (1976, प्रथम
निर्देशन: मनोहर सिंह), कैम्प (1977, प्रथम
निर्देशन : बाबा डी. के.), अन्तरंग (1978, प्रथम
निर्देशन: वाई.जी. जोगलेकर), कालपात्र (1978,
प्रथम निर्देशन: राम गोपाल बजाज), लोमडवेश (1980, प्रथम निर्देशन बंशी कौल), जल डमरू बाजे (2007, प्रथम निर्देशन राम गोपाल बजाज), मैं शबरी (अप्रकाशित), पुत्र फल और जहर (2014, प्रथम रंगपाठ निर्देशन : राजेश सिंह)।
कुछ विदेशी नाटकों के अनुवाद एवं रूपान्तरण में इलेक्ट्रा, ट्वेल्थ नाइट, बाजी, शान्त सागर में एक रोज और कुण्ठा आदि नाटक शामिल हैं।
1989-90 में अमेरिका के फोर्ड फाउण्डेशन से फेलोशिप मिली जिसके कारण वे भारत भवन, भोपाल में ‘प्लेराइट इन-रेसिडेंस’ में रहे।
नाटकों के अलावा उन्होंने कविताएँ और कहानियाँ भी लिखी हैं जो विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं; टेलीविजन के लिए कई विख्यात निर्देशकों के
राहुल चौधरी
जन्म 1972, दिल्ली। 1995 में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक। 2002 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से थिएटर की तकनीकी कार्यशाला। 1995 से 2001 तक त्रिवेणी कला संगम से पेण्टिंग में विशेषज्ञता और 1996-97 में शंकर अकादमी ऑफ आर्ट्स से इलस्ट्रेशन और ग्राफिक्स; 1994 में राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली से भारतीय और यूरोपीय कला विषय में सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम पूरा किया।
भारत सरकार के संस्कृति मन्त्रालय द्वारा सीनियर फेलोशिप 2017 से 2019; नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा द्वारा आयोजित आदि रंग महोत्सव (2014-15), भारत रंग महोत्सव (1999-2007) और आदि बिम्ब (2014) जैसे कार्यक्रमों में समन्वयक रहे। 2019 में संगीत नाटक अकादेमी द्वारा आयोजित योग पर्व में भाग लिया।
राहुल चौधरी ने कई कला इंस्टॉलेशन और परियोजनाओं पर काम किया, जैसे वसुन्धरा थिएटर फेस्टिवल (2018), बेतला महोत्सव, झारखण्ड (2018), Cheshire Home, दिल्ली (2017), उदयपुर वर्ल्ड म्यूजिक फेस्टिवल (2017) और ‘यार्न यात्रा’ (2016)। प्रमुख एकल प्रदर्शनियों में Dead Ear Tree (2022), सायनोटाइप प्रिण्ट्स (2015) और Faces (2013) शामिल हैं।
अन्य कई सामूहिक प्रदर्शनियों के अलावा वह Hiroshima Never Again (दिल्ली, 2005), और (टोक्यो, 1997) में भी शामिल हैं।
फिल्म ‘गर्म रेत’ और ‘War Lord’ (दोनों 2020 में); 2001 में ‘ People and Art’ का लेखन, निर्देशन और निर्माण किया। Eclectics, Relicmongers, Studio Spaces तथा द रामेश्वर प्रेम फाउण्डेशन जैसे कला समूहों के संस्थापक सदस्य हैं।
राहुल चौधरी को अवन्तिका द्वारा सम्मान 1998 और 1996 में कांस्य पदक प्राप्त हुआ। उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में रिसर्च और डॉक्यूमेण्टेशन असिस्टेण्ट (1999-2007, 2014-15) तथा संगीत नाटक अकादेमी में 2019 में कंसल्टेण्ट के रूप में कार्य किया। सम्प्रति वह दिल्ली एवं गोवा में रहते हैं।





























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