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Stri ka manusyatva: samyik sahitya vimarsh by Malchand Tiwadi

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‘स्त्री का मनुष्यत्व’ – मालचंद तिवाड़ी 


‘स्त्री का मनुष्यत्व’ में कवि कथाकार मालचंद तिवाड़ी अनेक गंभीर साहित्यिक प्रश्नों से रू-बरू होते हैं। बांग्ला उपन्यासकार शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास ‘चरित्रहीन’ की सहनायिका किरणमयी के अपने चरित्र-विश्लेषण में वे उपन्यास लेखन की कला के सन्दर्भ से कई बुनियादी सवाल उठाते हैं। वे पूछते हैं: क्या कला ही वह दर्पण नहीं है जिसमें झांककर हम अपने औसत किरदार से मुक्ति पा सकते हैं? तिवाड़ी मानते हैं कि लेखक होना इसी परम मनुष्यता के धोखे में विश्वास रखना है। किरणमयी के रूपान्तरण की उनकी व्याख्या में प्रेम का स्पर्श ही उसके चरित्र को मनुष्यता में आलोकित करता है, न कि कोई जड़ीभूत सामाजिक मूल्य-व्यवस्था। यहां वे लेखक के अपने विचारों व उसके कलाकर्म के बीच के द्वन्द्व को भी रेखांकित करते हैं। इस संग्रह में तिवाड़ी अपने अग्रजों के साथ-साथ अपने समकालीन और युवतर लेखकों की कलात्मक अन्वेषण की प्रक्रिया को भी एक सुथरे साहित्य-विवेक की कसौटी पर परखते हैं और कुछ सामान्य निष्कर्ष सामने रखते हैं। उनका मानना है कि अभिधा से भी कविता संभव हो सकती है और संस्कृतियों की परस्पर आवाजाही के लिए अनुवाद भले ही एक अपरिहार्य कर्म हो, मगर इसके अपने खतरे भी कम नहीं।
रवीन्द्रनाथ टैगोर की ‘गीताञ्जलि’ को नोबेल पुरस्कार मिलने की परिघटना की उनकी एक व्याख्या यह भी है कि इससे भारतीय मातृभाषाओं में एक अनूठे उत्साह और आत्मविश्वास का संचार हुआ, जिसके बल पर वे अपनी काव्य भाषा के व्यवहार की नाना रूढ़ियों से मुक्त हो सकीं। तिवाड़ी गोस्वामी तुलसीदास और उनके पूर्ववर्ती फारसी शाइर हाफिज़ शीराजी के बीच की एकाध समानता के हवाले से यह बताना भी नहीं भूलते कि समर्थ लेखक किस प्रकार अपनी परंपरा को त्याग और ग्रहण की प्रक्रिया से नवीन संस्पर्श देते हुए अपने रचनाकर्म को समृद्ध कर सकता है। संग्रह में ‘सपने में मां और सुन्दरकाण्ड’ व ‘मृत्यु : एक चिट्ठी’ सरीखे निबन्ध काव्यात्मक विचार प्रक्रिया का एक अनूठा लालित्य लिए हुए हैं, जो सुन्दर गद्य-कविता का-सा आस्वाद कराते हैं। संक्षेप में यह संग्रह मुक्तिबोध की शब्दावली में पाठक से ‘ज्ञानात्मक संवेदन और संवेदनात्मक ज्ञान’ दोनों की भरपूर अपेक्षा लिए हुए है।
– अविनाश व्यास 

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Description

About the Author:

मालचन्द तिवाड़ी
जन्म : 19 मार्च, 1958 (बीकानेर)
शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी साहित्य)
हिन्दी व राजस्थानी लेखन में समान रूप से गतिशील तिवाड़ी की अब तक लगभग एक दर्जन पुस्तकें विविध विधाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्ष 2014 में प्रकाशित उनकी डायरी विधा की कृति ‘बोरूंदा डायरी’ को राजकमल प्रकाशन द्वारा वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कृति के रूप में पुरस्कृत किया गया। साहित्य अकादेमी पुरस्कार, हिन्दी अकादमी, नई दिल्ली के सहभाषा सम्मान तथा राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के सर्वोच्च सूर्यमल मीसण पुरस्कार समेत अनेकशः समादृत तिवाड़ी साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली के राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक (वर्ष 2003-2007) भी रहे हैं। गुरुदेव टैगोर के जन्म की डेढ़ सौवीं जयन्ती के उपलक्ष्य में साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित ‘गीताञ्जलि’ का राजस्थानी भाषा में गीति-अनुवाद तिवाड़ी की अनुवाद-कर्म में एक विशेष उपलब्धि मानी जाती है। उनका एच जी वेल्स की कालजयी विज्ञान कथा ‘टाइम मशीन’ का हिन्दी अनुवाद भी इसी श्रेणी में आता है।
सम्प्रति : स्वतन्त्र लेखन


Additional information

ISBN

8189303155

Author

Malchand Tiwadi

Binding

Paperback

Pages

136

Language

Hindi

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