Chhavi Se Alag (Sansmaran) By Vinod Das

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छवि से अलग -विनोद दास


साहित्य-संस्कृति की जगमगाती रोशनियों की चकाचौंध में हम जिन रचनाकारों के प्रति आकर्षित होते हैं, अक्सर उनके करीब आने पर वे अपनी छवि के कुछ हमें अलग दिखते हैं। उनके दैनिक व्यवहारों, वार्तालापों, आपसी बनते-ढहते सम्बन्धों का उनके अन्तर्लोक और रचना पर किस तरह प्रभाव पड़ता है, यह जानना उनके एक प्रेम पाठक के लिए ही रोचक ही नहीं होता, एक कृतिकार के रचना व्यक्तित्व के जटिल बन्द ताले को खोलने-समझने के लिए किसी शोधार्थी के लिए कुंजी भी बन जाता है।
इस पुस्तक में विनोद दास ने साहित्य-संस्कृति के तेरह जाने-माने व्यक्तित्वों के चित्र उकेरे हैं जिनके स्मृति दृश्यों में संवेदना का रक्त दौड़ता है। इसमें पिरोये प्रसंग स्पन्दनों से भरे हैं। कहीं पर विनोद दास पेंसिल की तरह व्यक्ति को रेखांकन हल्के से करते हैं तो कहीं पर आपको किस्सागोई के सान्द्र रस में डुबो देते हैं। अक्सर व्यक्ति चित्रों में नायक और खलनायक की दो कोटियाँ बना दी जाती हैं। विनोद दास ऐसे विभाजन से बचते हैं। इन संस्मरणों में न तो पूजाभाव का आग्रह है और न ही किसी को खलनायक बनाने की जिद। यहाँ ठोस मनुष्य है। जीता-जागता-साँस लेता। गुण-दुर्गुणों से भरा एक मनुष्य ।
काव्यात्मक भाषा में यह पुस्तक एक ऐसी सृजनात्मक संरचना है जिसमें जीवन के विविध राग-रंग हैं। लीक से हटकर पढ़ने का आस्वाद लेने के इच्छुक पाठकों के लिए यह एक ऐसा नायाब तोहफ़ा है जिसे वे सिर्फ़ अपने निजी पुस्तकालय में रखने में ही नहीं, अपने साथी-संगी को उपहार के रूप में देने में भी हर्ष महसूस करेंगे।


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Description

Chhavi Se Alag (Sansmaran) By Vinod Das

About Author:

विनोद दास
जन्म : उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के कमोली गाँव में, 10 अक्टूबर 1955.
शिक्षा : लखनऊ विश्वविद्यालय से अँग्रेज्ती में एम.ए.।
कृतियाँ : कविता संग्रह ख़िलाफ़ हवा से गुजरते हुए, वर्णमाला से बाहर, कुजात और पतझड़ में प्रेम।
उपन्यास : सुखी घर सोसाइटी।
कहानी संग्रहः बीच धार में।
सिनेमा : भारतीय सिनेमा का अन्तःकरण।
आलोचना : कविता का वैभव (काव्यालोचना) और सृजन का आलोक (गद्यालोचना)।
साक्षात्कार : बतरस ।
साक्षरता : साक्षरता और समाज।
अँग्रेज्ती में अनूदित कविताओं का चयन: The World on a Handcart.
अनुवाद : सिनेमेटोग्राफर राधू करमाकर की आत्मकथा : कैमरा मेरी तीसरी आँख। विश्व की कहानियों का अनुवाद-सरहद के पार के महान कथाकार। विदेशी कविताओं का विपुल अनुवाद।
सम्पादन : ‘अन्तर्दृष्टि’ पत्रिका का प्रकाशन-सम्पादन, भारतीय भाषा परिषद् की मासिक पत्रिका ‘वागर्थ’ का सम्पादन।
पुरस्कार : युवा पुरस्कार के अन्तर्गत भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार (1986), श्रीकान्त वर्मा सम्मान (1996), केदारनाथ अग्रवाल सम्मान (2000) और शमशेर सम्मान
(2003).

Additional information

Author

Vinod Das

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-802-1

Pages

200

Publication date

30-01-2025

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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