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VISARJAN (Novel) by Raju Sharma

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विसर्जन (उपन्यास) — राजू शर्मा


अपने पहले उपन्यास ‘हलफनामे’ से प्रसिद्धि पाने वाले कथाकार राजू शर्मा का दूसरा उपन्यास है विसर्जन ।
हिन्दी संसार में भूमण्डलीकरण पर लगभग दो दशकों से चर्चा हो रही है किन्तु उस यथार्थ को बड़े औपन्यासिक ढाँचे में विन्यस्त और प्रकट करने का श्रेय विसर्जन के रचनाकार राजू शर्मा के ही हिस्से में जाता है। भूमण्डलीकरण ने हमारी दुनिया की शक्ल को बुनियादी तौर पर बदलकर रख दिया है। यह कहना अत्युक्ति न होगी कि उसने मनुष्य के मूल्यों, आस्थाओं, संवेदनाओं, सम्बन्धों के इलाके में अब तक के इतिहास की सबसे भारी उथल-पुथल पैदा की है। मनुष्यता पर पड़ने वाले उसके प्रभाव पर केन्द्रित भले ही कुछ रचनात्मक दृष्टान्त हैं किन्तु भूमण्डलीकरण की शक्ति-संरचना का उसी की जमीन पर विखण्डन पहली बार विसर्जन में ही सम्भव हो रहा है। प्रधानमन्त्री, अर्थशास्त्री, प्रशासनिक मशीनरी, गुप्तचरी आदि के जरिये राजू शर्मा विसर्जन में ऐसा अद्भुत आख्यान रचते हैं कि उत्तर-पूँजीवादी दुनिया के ब्रह्मास्त्र और कवच भूमण्डलीकरण का सारा भेद खुल जाता है। राजू शर्मा की रचनात्मक शक्ति इस मायने में भी आश्वस्त करती है कि वे भूमण्डलीकरण के किले में प्रविष्ट होकर उसकी व्यूह रचना को उजागर करते हैं।
विसर्जन में मनुष्यता के सम्मुख उपस्थित संकट की गहन खोज और उसका आखेट है, पर यह सब कुछ ऐसे गहरे रचनात्मक धैर्य और सूझ-भरी निस्संगता से मुमकिन किया गया है कि विसर्जन सत्य और गल्प, यथार्थ और कला, विचार और संवेदना, प्रतिबद्धता और निष्पक्षता जैसी विपर्यय दीखने वाली सृजनात्मक सिद्धियों को एकसाथ अर्जित करने वाला उपन्यास बन जाता है।
विसर्जन अपने अभिनव विषय की व्यापकता एवं गहराई के कारण महत्त्वपूर्ण है, वह इसलिए भी कीमती है कि यहाँ सच्चाई का अनुवाद नहीं, उसका गजब का पुनसृजन है। एक से एक अविस्मरणीय चरित्रों, वृत्तान्तों से सम्पन्न इस कृति में अर्थगर्भिता और व्यंजनाओं का ऐसा अभूतपूर्व वैभव है जो मौजूदा साहित्यिक परिदृश्य में दुर्लभ है।
विसर्जन न केवल राजू शर्मा की कथायात्रा की अगली मंजिल है वरन् उसे हिन्दी उपन्यास की उपलब्धि के रूप में भीस्वीकार किया जाएगा, ऐसी उम्मीद बाँधना उचित ही होगा।
– अखिलेश


 

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Description

VISARJAN (Novel) by Raju Sharma


About The Author

राजू शर्मा
जन्म : 1959
शिक्षा : दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर । लोक प्रशासन में पी-एच.डी. ।
1982 से 2010 तक आईएएस सेवा में रहे। उसके बाद से स्वतंत्र लेखन, मुसाफ़रत और यदा-कदा की सलाहनवीसी। लेखन के अलावा रंगकर्म, फ़िल्म व फ़िल्म स्क्रिप्ट लेखन में विशेष रुचि ।
प्रकाशन : हलफनामे, विसर्जन, पीर नवाज़, क़त्ल गैर इरादतन (उपन्यास); शब्दों का खाकरोब, समय के शरणार्थी, नहर में बहती लाशें (कहानी-संग्रह); भुवनपति, मध्यमवर्ग का आत्मनिवेदन या गुब्बारों की रूहानी उड़ान, जंगलवश (नाटक)। अनेक नाटकों का अनुवाद व रूपांतरण-पिता (ऑगस्त स्ट्रिनबर्ग)।


विसर्जन — राजू शर्मा

Additional information

Author

Raju Sharma

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-065-0

Pages

628

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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