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Dharma, Sanskriti Aur Rajneeti By Shashank Chaturvedi

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Dharma, Sanskriti Aur Rajneeti By Shashank Chaturvedi

शशांक चतुर्वेदी द्वारा इस पुस्तक में धर्म के अर्थ कइ विस्तृत श्रेणी कइ उपयोगिता, नाथ सम्प्रदाय के संक्षिप्त इतिहास और हिंदुत्ववादी राजनीति कइ उसमें बढ़ती भूमिका के साथ-साथ गोरखपुर कइ राजनीति में गोरखपुर मठ के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डालने का प्रयत्न किया गया है।


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Description


वृहत् और सूक्ष्म राजनीति के सन्दर्भ में यह अध्ययन गोरखपुर में नाथ सम्प्रदाय और गोरखनाथ को केन्द्र में रखकर भारत में धर्म, संस्कृति और राजनीति के अन्तर्सम्बन्धों को समझने और उसका विश्लेषण करने का प्रयत्न है। इस क्रम में धर्म के अर्थ की ‘विस्तृत श्रेणी’ की उपयोगिता, नाथ सम्प्रदाय के संक्षिप्त इतिहास और हिन्दुत्ववादी राजनीति की उसमें बढ़ती भूमिका के साथ-साथ गोरखपुर की राजनीति में गोरखनाथ मठ के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डालने का प्रयत्न किया गया है।
इसमें गोरखपुर के इतिहास के उन पन्नों को पलटने का प्रयत्न किया गया है ताकि गोरखपुर क्षेत्र की अस्मिता, भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सेक्रेड जियोग्राफी के मिले-जुले स्वरूप के बनने में समय-समय पर प्रयोग में लाये गये प्रतीकों और ऐतिहासिक घटनाओं का एक पुनरवलोकन हो सके। यहाँ उद्देश्य गोरखपुर के सामूहिक स्मृति-पटल को एक बार खंगालना है ताकि सामूहिकता का बोध कराती छवियों को पाठक के मन-मस्तिष्क पर अंकित किया जा सके।


अन्य स्थानों की तरह ही गोरखपुर के सामूहिक स्मृति-पटल पर इतिहास के उकेरे गये कुछ महत्त्वपूर्ण निशान क्षेत्र रह ही गये हैं। इनमें से कई एक किसी भी स्थानीय निवासी से बात करने पर स्वतः उभरकर सामने आते हैं। इनमें कुछ, जैसे कि गोरखनाथ मठ, गीता प्रेस, चौरी चौरा की घटना, मुंशी प्रेमचन्द की कर्मस्थली, बुद्ध और कबीर की तपोभूमि, या फिर 1970 से नब्बे के दशक तक ‘जरायम की दुनिया का काला अध्याय’। बातचीत के मध्य यह सम्भव है कि यहाँ का वासी आपको गोरखपुर का परिचय उसके तात्कालिक व्यावसायिक प्रतीकों जैसे हवाई अड्डा के फिर से चालू होने, सिटी मॉल, पाँचतारा होटलों के बनने, रामगढ़ताल में क्रूज़ और फ्लोटिंग रेस्तराँ, वाटर पार्क, एम्स की स्थापना अथवा गोरखपुर रेलवे स्टेशन के दुनिया का दूसरा सबसे लम्बा प्लेटफ़ॉर्म होने के मारफत दे। अगर आप बातचीत को थोड़ा लम्बे समय तक खींच पाने में सफल रहे तो जल्द ही तात्कालिक प्रतीकों का क्रम टूटता है और आपका परिचय होता है इतिहास के उन उपरोक्त पन्नों से जिसे पूर्वी उत्तर प्रदेश के इस क्षेत्र ने बड़े जतन से, कम से कम सामूहिक चेतना में, महफूज रखा है।
– इसी पुस्तक से


About the Author:

कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) के मूल निवासी
ने उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से प्राप्त की।
उन्होंने जेएनयू के सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज़ से गोरखपुर की स्थानीय राजनीति की पृष्ठभूमि में गोरखनाथ मठ के योगदान पर शोध किया। 2016 में यूनिवर्सिटी कॉलेज लन्दन से सम्बद्ध होकर ‘डेमोक्रेटिक कल्चर इन साउथ एशिया’ विषय पर शोध किया। इसके बाद इन्द्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वीमेन (दिल्ली विश्वविद्यालय) और टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज में अध्यापन किया।
सम्प्रति : इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ, निरमा यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद में असिस्टेण्ट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में रिसर्च एफिलिएट के तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक इतिहास पर रिसर्च कर रहे हैं।
Foundation for Creative Social Research, नयी दिल्ली से भी सम्बद्ध ।

Additional information

ISBN

9788196103484

Author

Shashank Chaturvedi

Binding

Paperback

Pages

152

Publication date

25-02-2023

Imprint

Setu Prakashan

Language

Hindi

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