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DES BIRANA (Novel) by Sahi Ram

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देस बिराना (उपन्यास) – सहीराम


‘क्या हो गया ? क्यों हो गया? जिंदगी में ऐसा क्या ग़लत हो गया ?’- ‘देस बिराना’ के केन्द्रीय चरित्र कर्मवीर जी का यह छोटा सा प्रश्न इस बृहदकाय उपन्यास की रचनात्मक धुरी है। यह प्रश्न जितना कर्मवीर जी की जिंदगी के बारे में है, उतना ही भारत के स्वातंत्र्योत्तर जीवन के बारे में भी। यह देश आज जिस मुक़ाम पर है, वहाँ यह सवाल पूछना तो लाज़िम है कि आखिर ऐसा क्या गलत हो गया !
उपन्यास आज़ादी की 60वीं सालगिरह के सरकारी जश्न पर केन्द्रित है। उसी की तैयारी के सिलसिले में वह हमें उपेक्षित स्वाधीनता सेनानी कर्मवीर जी तक ले चलता है और उनके पास पहुँचते ही उपन्यास में आजादी की लड़ाई का वह पूरा परिदृश्य उभर आता है जो कथा के वर्तमान में मौजूद साठ-साला आज़ाद भारत के परिदृश्य से लगभग उलट है। इन्हें जक्स्टापोज़ करता हुआ यह उपन्यास 21वीं सदी की पहली दहाई के उदारीकृत, वैश्वीकृत और साम्प्रदायिक जातिगत रूप से ध्रुवीकृत विभाजित भारत की एक डिस्टोपियन तस्वीर उभारता है जिसमें आगामी हिन्दुत्त्ववादी क़ब्ज़े की भयावह छायाएँ मौजूद हैं।
एक व्यंग्यकार जब उपन्यास लिखता है तो वह जितना कथा-स्थितियों से खेलता है, उतना ही वाचकीय टीका-टिप्पणियों से भी। सहीराम जी सुपरिचित व्यंग्यकार, कहानीकार और पत्रकार हैं और अपने इस पहले उपन्यास में ही उन्होंने दो स्तरों के इस खेल को बखूबी साधा है। जातिवादी राजनीति के दाँव-पेंच बताते हुए सहीराम ही कह सकते हैं, ‘हमेशा अपने को बेहतर और बेजोड़ साबित करने की प्रतियोगिताएँ ही नहीं चला करतीं। अपने को विक्टिम साबित करने की स्वस्थ प्रतियोगिताएँ भी चलती हैं। असल में अपने को विक्टिम साबित किये बिना मिलिटेन्सी नहीं आती।’ ऐसी वाचकीय टिप्पणियाँ उपन्यास को दिलचस्प और पठनीय तो बनाती ही हैं, हमारे समय को पहचानने की गहरी अन्तर्दृष्टि भी देती हैं।
– संजीव कुमार


 

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Description

DES BIRANA (Hindi Novel) by Sahi Ram


About The Author

सहीराम
जन्म : हरियाणा के जिला महेन्द्रगढ़ में गाँव जयलाफ़ के एक साधारण किसान परिवार में।
शिक्षा : एम.ए., एम.फिल. ।
लेखन : शुरुआत कहानियों से हुई। अनेक प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में कहानियाँ प्रकाशित। ‘उसका घर’ तथा ‘शिकस्त’ कहानियाँ भारत ज्ञान-विज्ञान समिति ने जनप्रसार के लिए पुस्तिकाओं के रूप में प्रकाशित कीं। कुछ साझा संग्रहों में भी कहानियाँ शामिल।
नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, राष्ट्रीय सहारा, दैनिक ट्रिब्यून, अमर उजाला, दैनिक भास्कर, नई दुनिया आदि दैनिकों में वर्षों से नियमित साप्ताहिक व्यंग्य कॉलम लिखे। कुछ कॉलम अभी भी प्रकाशित हो रहे हैं। आउटलुक, कादम्बिनी, शुक्रवार, द पब्लिक एजेंडा, युवा संवाद आदि पत्रिकाओं में भी नियमित व्यंग्य कॉलम प्रकाशित होते रहे। सहारा समय, संडे नयी दुनिया, संडे इंडियन, आदि साप्ताहिकों में भी व्यंग्य प्रकाशित। अब तक तकरीबन पाँच हजार व्यंग्य रचनाएँ प्रकाशित।
आकाशवाणी के राष्ट्रीय चैनल के लिए ‘ढाबा’ नामक धारावाहिक लिखा। 1857 के विद्रोह पर कुछ नौटंकियाँ लिखीं। कुछ व्यंग्य रचनाएँ भी प्रसारित हुईं। टीवी के लिए भी कुछ पटकथाएँ लिखीं। लोकगायन शैली में ‘संघर्ष कथा’ तथा ‘1857’ शीर्षक से दो आल्हा भी लिखे, जो जनप्रसार के लिए पुस्तक रूप में प्रकाशित हुए।
‘देस बिराना’ पहला उपन्यास है।


DES BIRANA (Hindi Novel) by Sahi Ram

Additional information

Author

Sahi Ram

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-025-4

Pages

461

Publication date

10-01-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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