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अनुवादक: श्रीसत्य
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बोरीस पास्तरनाक (1890-1960) चित्रकार पिता लियोनिड
पास्तरनाक और संगीतज्ञ माता रोजा कॉफमेन की प्रथम सन्तान बोरीस पास्तरनाक को दृश्य-संवेदन और ध्वनि-संवेदन तो मानो विरासत में ही मिले थे। 1917 से 1932 के बीच की अवधि में पास्तरनाक रूसी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर हो गये थे। 1932 में अपनी आत्मकथात्मक कविता ‘स्पेक्टोस्की’ के प्रकाशन के बाद उन पर समाजविरोधी होने के आरोप लगाये गये और उन्हें सोवियत सत्ता का कोपभाजन होना पड़ा। पास्तरनाक इस के बाद मास्को की उपबस्तियों में लगभग एकान्त में रहते हुए जीविका के लिए अनुवाद कार्य करते रहे मुख्यरूप से शेक्सपियर और गेटे की रचनाओं का अनुवाद। उन्होंने रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविताओं का भी रूसी में अनुबाद किया। लगभग पचीस वर्ष की चुप्पी के बाद उन के उपन्यास ‘डॉ. जिवागो’ का प्रकाशन हुआ। 1958 में उन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ‘डॉ. ज़िवागो’ के अतिरिक्त ‘ट्विन्स इन दि क्लाउड’, ‘माई सिस्टर, लाइफ’, ‘थीम्स एण्ड वेरिएशन्स’, ‘एरियल वेज’, ‘दि ईयर 1905 ‘लेफ्टिनेंट श्मिट’ आदि उन की कृतियाँ बहुत प्रसिद्ध हुईं। ‘सेफ कंडक्ट’ शीर्षक से प्रकाशित उन की आत्मकथा भी बहुत लोकप्रिय हुई।
श्रीसत्य : हिन्दी के कथाकार-अनुवादक। उपन्यास ‘चिन्मय’, ‘स्वप्नशेष’, ‘सती’ तथा ‘मुण्डे मुण्डे मतिर्भिन्ना’ (हास्य-व्यंग्य) प्रकाशित।





























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