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Prasang Apbhransh Edited by Kumar Mangalam

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प्रसंग अपभ्रंश : सम्पादन – कुमार मंगलम


अपभ्रंश, यात्रा, ज्ञान, अध्ययन का चयन


अपभ्रंश भारतीय आर्य भाषा परिवार की महत्त्वपूर्ण और समृद्ध भाषा है। अपभ्रंश का विपुल साहित्य इसके महत्त्व को स्थापित करती है। अपभ्रंश के लिए पुराने संस्कृत पाठों में अपभ्रष्ट और अपभ्रंश एवं प्राकृत-अपभ्रंश ग्रन्थों में अवब्भंस, अवहंस, अवहत्थ, अवाहट्ठ, अवहठ, अवहट इत्यादि नाम प्राप्त होते हैं। सरहपा, कण्हपा, स्वयम्भू, पुष्पदन्त, धनपाल, रयधू, अब्दुर्रहमान, जोइन्दु, रामसिंह, हेमचन्द्र से लेकर उत्तरवर्ती अपभ्रंश यानी अवहट्ट के लेखक विद्यापति तक अपभ्रंश के मान्य रचनाकार हैं। डॉ. नामवर सिंह के अनुसार, “ अपभ्रंश ही वह आर्य भाषा है जो ईसा की लगभग सातवीं शताब्दी से तेरहवीं शताब्दी तक सम्पूर्ण उत्तर भारत की सामान्य लोक-जीवन के परस्पर भाव-विनिमय और व्यवहार की बोली रही है।”

— भूमिका से

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Prasang Apbhransh Edited by Kumar Mangalam


About The Author

कुमार मंगलम की खास दिलचस्पी कविता और आलोचना में है। इन्होंने ज्ञानेन्द्रपति की प्रतिनिधि कविताओं का संचयन-सम्पादन किया है। रघुवीर सहाय पर केन्द्रित उद्भावना के अंक ‘आने वाला खतरा’ नाम से सम्पादित किया है। फिलहाल उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्राध्यापक हैं।


प्रसंग अपभ्रंश सम्पादन कुमार मंगलम

Additional information

Editor

Kumar Mangalam

Binding

Paperback

Language

Hindi

ISBN

978-93-6201-001-8

Pages

462

Publication date

15-06-2026

Publisher

Setu Prakashan Samuh

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