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Jo Bachega Kaise Rachega – Shrikant Verma

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जो बचेगा कैसे रचेगा ? श्रीकान्त वर्मा के उद्धरण

श्रीकान्त वर्मा अपने समय के शायद सबसे नाराज कवि थे : वे इस पर पूरी निर्ममता और बेबाकी से इसरार कर सकते थे कि ‘जो मुझसे नहीं हुआ/ वह मेरा संसार नहीं।’ वे शिद्दत से महसूस करते थे कि ‘मेरे चारों ओर हत्यारे हैं!’ उन्हें यह स्वीकार करने में कभी संकोच नहीं हुआ’… मेरी रचनाओं में वसन्त कभी नहीं आया’। उनमें ग्लानि है, सन्ताप है, दुख है, पीड़ा है, भय है, सिनिसिज्म है, मृत्यु है। ‘वे देख सकते थे कि जब पौ फटती है तब लगता है संसार में पहली बार सबेरा हो रहा है। मगर थोड़ी देर में यह संसार एक पुरानी, बासी दुनिया में बदल जाता है।’ उनकी रचनाओं से कुछ उद्धरणों का यह संचयन वरिष्ठ आलोचक राजेन्द्र मिश्र ने तैयार किया है। रजा पुस्तक माला में मुक्तिबोध, अज्ञेय, विनोबा भावे के उद्धरणों के संचयन पहले ही प्रकाशित हो चुके हैं। यह संचयन उसी क्रम में चौथा है जिसे प्रस्तुत करते हुए हमें प्रसन्नता है।
– अशोक वाजपेयी


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Description

About the Author

श्रीकान्त वर्मा (१९३१-१९८६)
नागपुर विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में एम.ए.। १९५५-५६ में बिलासपुर से ‘नयी दिशा’ का सम्पादन। फिर भविष्य की खोज में दिल्ली आ गये। कुछ दिनों तक ‘भारतीय श्रमिक’ में उपसम्पादक। १९५८ से ६२ तक दिल्ली की विशिष्ट पत्रिका ‘कृति’ का नरेश मेहता के साथ सम्पादन। १९६४ से साप्ताहिक ‘दिनमान’ से सम्बद्ध हुए। सन् ७७ में ‘दिनमान’ से त्यागपत्र। सन् ६७ में वीणा वर्मा से विवाह और सन् ६८ में अभिषेक का जन्म।
कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय भागीदारी। सन् ७६ में म.प्र. से राज्यसभा के सदस्य। सन् ८० में कांग्रेस के चुनाव अभियान का संचालन। सन् ८५ में कांग्रेस पार्टी के प्रमुख महासचिव और प्रवक्ता ।
अब तक कविता, कथा और विविध लेखन की पच्चीस पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पुस्तकों का सम्पादन। अनेक कृतियों के अनुवाद भारतीय और विदेशी भाषाओं में प्रकाशित और चर्चित। विश्व के प्रमुख देशों की अनेक यात्राएँ। वहाँ के विश्वविद्यालयों, सांस्कृतिक केन्द्रों में व्याख्यान ।
अनेक पुरस्कारों से सम्मानित, जिनमें सन् ८१ में म.प्र. शासन का प्रथम शिखर सम्मान, सन् ८५ में इंदिरा प्रियदर्शिनी सम्मान और सन् ८६ में मरणोपरान्त साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्रमुख ।

Additional information

ISBN

9788194172499

Author

Shrikant Verma

Binding

Hardcover

Pages

88

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Imprint

Setu Prakashan

Language

Hindi

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