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Kavita Devai Deeth By Rajesh Kumar Vyas

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कविता देवै दीठ – डॉ. राजेश कुमार व्यास   (राजस्थानी कविता)


नाद साव धुन ही नीं है। बठै लय हुवै, ताल हुवै अर हुवै-जीवण री राग। इण दीठ सूं परखां तो डॉ. राजेश कुमार व्यास री ओ कवितावां जीवण रो अणहद नाद है। सबद उजास मांय संगीत, चित्रकला अर तमाम दूजी कलावां रै मर्म री ऊंडी साख भरती इण कवितावां मांय ठौड़-ठौड़ भावां रो फुटरापी है।
ओक तरै सूं राजस्थानी भासा री लय अर्वेरती इण कवितावां मांय व्यास भणन आळा सामीं बिम्ब, उपमावां अर रूपकां मांय सबद री न्यारी न्यारी अरथ छवियां राखै। कवि सुर रो पारखी है, चित्रकला नै ऊंडाई सूं ओळखै अर सबद रै मांय रै सबद नै जोवतै कविता रो नूंवो मुहावरौ गढ़े। गति, लय अर प्रवाह री दीठ सूं भी अ कवितावां इण दौर मांय राजस्थानी मांय नींव रो भाठो कैयी जा सकै। आं मांय थोड़े मांय घणी बात है। मिनखाचारै रो ओपतो बखाण है अर सबद, रंग अर राग सूं कविता रो नैड़ो अर खरो सगपण है।
कविता री जड़ होयोड़ी परम्परा रै धेरै सूं बाण्डै बिम्बा री गढत मांय भासा री सावठी लय अर्वेरे-अ कवितावां। मानखै री मनगत रा सावठा चितराम इण कवितावां मांय है।
माणा रै मिणका ज्यूं आपसरी में सैजौड़ गूंथ्यौड़ा कवि रा सबद आपरी व्यंजना मांय भासा अर संस्कृति रै सागै बदळती चेतना रो बेलाग इतियास आं मांय रचै। कवि इण मुजब ही कवितावां मायं कणैई ‘सरणाटे रै सुनपण’ नै सुणै तो कणेई ‘भोर रै उजास’ सूं कविता लिखे। कणेई सबद रै मांय रै सबद कनै पूग जावै तो कणेई कविता कवि नै आस रा किवाड़ खोलती लखावै। दीठ-अदीठ मांय व्यास इण कवितावां मांय कुदरत री कोरणी सूं उपजता सबद, रंग अर रागरा नूंवा थान थरप्या है। इण कवितावां मांय ‘तारा पूछे सवाल, आभौ हुय जावै जवाब’ जैड़ी ओपती सबद व्यंजना है तो ‘काळ रै अणहद नाद’ सूं उपजती कविता री दीठ रा सांवठा चितराम ठौड़ ठौड़ है। … सबद सिणगार मांय सुरां री सौरम लियौड़ी है ओ कवितावां।

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Description

Kavita Devai Deeth By Rajesh Kumar Vyas (Rajasthani Poems)


About The Author

डॉ. राजेश कुमार व्यास

जलम 14 सितम्बर, 1973 (बीकानेर)
भणाई – पीएच.डी, एमजेएमसी, एमकॉम, पीजीडीसीए
कवि, आलोचक अर स्तम्भकार। पैलो कविता संग्रै ‘जी रैयो मिनख’ बरस 1995 मांय आयौ। संस्मरण री ओक पोथी छपण मत्तै। ललितकला अकादेमी सूं ‘कलावाक्’, एनबीटी सूं जातरा संस्मरण री पोथी ‘कश्मीर से कन्याकुमारी’ नै बीजी 18 महताबू पोथ्यां प्रकाशित ।
लारलै तेईस बरसां सूं टीवी, रेडियो अर अखबारां मांय लगोलग लेखन। राजस्थान पत्रिका, नवज्योति, भास्कर, हिन्दुस्तान मांय लिख्या कॉलम घणा सरायीज्या। लारलै पांच बरसां सूं ‘डेली न्यूज’ रै एडिट पेज मांय हर हफ्ते संगीत, नृत्य, चित्रकला री परख रो ‘कलातट’ कॉलम।
दूरदर्शन सूं प्रसारित राजस्थानी साहित्य रै चावै कार्यक्रम ‘मरुधरा’ रो विगत दस बरसां सूं संयोजन-संचालन। दूरदर्शन खातर डेढ दर्जन सूं बेसी डॉक्यूमेंट्री रा लिखारा। दूरदर्शन डॉ. व्यास रै सोध अर लेखण पर ही 20 कड्यां रो जातरा वृतान्त धारावाहिक ‘डेजर्ट कॉलिंग’ बणा’र उणरो आपरै नेशनल चैनल सूं प्रसारण कर्यो है।
पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार सूं ‘राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार’, राजस्थान सरकार रो ‘उत्कृष्ट लेखक’ पुरस्कार, भारत सरकार सूं जातरा लेखण मांय देश रो पेलो पुरस्कार, जनसम्पर्क पत्रकारिता से ‘माणक अलंकरण’, राजस्थान युवा संस्था सूं ‘कला लेखन’ पुरस्कार रै सागै व्यास ने केन्द्रीय साहित्य अकादमी कानी सूं राजस्थानी भासा री लेखक जातरा फैलोशिप भी मिली है। संगीत, साहित्य, चित्रकला अर जातरा विषयक व्यास रा व्याख्यान भी इणगी देशभर मांय घणा चर्चित रैया है।
संप्रति-राजस्थान सरकार मांय सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी।


पढ़ता हूं तो राजस्थानी समझ में आती है।… मैं तुम्हारी (राजेश कुमार व्यास) कविताओं को लेकर कह सकता हूं कि तुमने अभिव्यक्ति की एक गहरी जमीन बड़ी सहजता से तोड़ी है।… बहुत कुछ महत्त्वपूर्ण है तुम्हारे पास, जिनका आभास देती हैं यह तुम्हारी कविताएं… लिखो, लिखो और इस दारुण समय को जिओ…
– कमलेश्वर
व्यास री कविता मांय सबद रौ नेपथ अर कैवण रौ मुंवौ रंग है। चित्रकला, संगीत आद कलावां नै कविता री संरचणा मांय कथीजण आळो राजेश बिरळौ कवि है। … कविता रा उण रा बिम्ब अर प्रतीक भी सोवणा नै मन मोवणा है।
– मालचन्द तिवाड़ी
डॉ. राजेश कुमार व्यास सिरजण मांय खुद रै आभै री घणकरी परत्यां खोलता लखावै। कविता मांय कैवण री लूंठी लय अर संस्कृति री सौरम मांडै। उच्छबधर्मिता री आपणी संस्कृति रै अणहद नाद रा व्यास चावा कवि है।
– प्रमोद शर्मा
व्यास सबद रै अरथ री संगत सुथराई सूं अंवेरै। कवि आपरी कविता मांय भाव-भौम सूं मूळ संवेदना नै सांतरे ढंग सूं कविता मांय कथै। गैराई सूं व्यंजना रो विस्तार बठै जोयो जा सकै।
– मदन सैनी
राजेश री कविता राजस्थानी कविता री नुवी संभावना री आस जगावै।… कवि जीवन नै आपरी दीठ सूं परोट उणरी नुंवी व्याख्या करी है। कविता री आ रचनात्मक ताकत कवि री कविता नै नुवै सन्दर्भों सूं जोड़’र एक मुंवी दीठ रो निरमाण करें।
– गोरधनसिंह शेखावत
राजेश आपरै ओळे-दोळे दायरा नै तोड़’र आगे निकळेला।… बो सोक्यूं देवैला जको परम्परागत पाठक री चाव सूं अलग पाठक में मुंवी चाव जगा सके।… राजेश आज रै बगत री विषमतावां, विसंगत्यां अर जूझतै मिनख री जिजीविषा रो कवि है।
– उमाकांत गुप्त


Additional information

Author

Rajesh Kumar Vyas

Binding

Hardcover

ISBN

9788189303679

Pages

96

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Publication date

10-02-2024

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