Description
Saleeb Par Shiksha By Shatrughan Prasad Singh
आपको यह जानकर ताज्जुब नहीं होना चाहिए कि दुनिया के विकसित देश अमेरिका, कनाड़ा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, फिनलैंड में अमीर-गरीब सबों के लिए समाज विद्यालय चल रहे हैं और शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतन प्राप्त हो रहा है।
इस आर्थिक नीति में ज्ञान के सृजन, सम्प्रेषण और वितरण पर भी बाजार का कब्जा हो गया है। विद्यालयों में नौनिहालों के भविष्य के साथ संसद में बैठे नीति नियन्ता खिलवाड़ कर रहे हैं। नौकरशाही, राजनेता के चक्रव्यूह में अभिमन्यु का रोज वध किया जा रहा है। सत्ता में बैठे धृतराष्ट्र शिक्षा रूपी द्रौपदी का चीरहरण टुकुर-टुकुर देख रहे हैं। काले धन की समानान्तर अर्थव्यवस्था चलाने वाले मुनाफाखोर अब सरस्वती को शीश महल में कैद कर रहे हैं।
– इसी पुस्तक से

About The Author
शत्रुघ्न प्रसाद सिंह
जन्म : 1 जनवरी 1943 लोकसभा और बिहार विधान परिषद के अतिरिक्त कई संस्थाओं और समितियों के सदस्य रहे। राजनीतिक सक्रियता के अलावा विभिन्न साहित्यिक, सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से भागीदार रहे।
शिक्षा : स्नातक (हिन्दी प्रतिष्ठा), गणेश दत्त कॉलेज, बेगूसराय, बिहार।
सेवा : बी.एन. उच्च विद्यालय, तेयाय (बेगूसराय) में अध्यापक । अवधेश आवासीय उच्च विद्यालय, सफापुर, बेगूसराय में प्रधानाध्यापक ।
अभिरुचि : समसामयिक विषयों पर निरन्तर लेखन।
पुस्तकें : और कारवाँ बनता गया, तेरी रहबरी का सवाल है, सलीब पर शिक्षा
































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