Anunad By Arun Khopkar

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‘अनुनाद’ साहित्य और सिनेमा के क्षेत्र में समान अधिकार से संचार करने वाले अरुण खोपकर के चौदह लेखों का संग्रह है। सौन्दर्यवेधक और जीवनोत्सुक वृत्ति से एक-दूसरे से जुड़े ये लेख कुतूहल जगाने वाली सहज भाषा में पाठकों के साथ सीधा संवाद करते हैं। शब्दकोश में सोये मासूम शब्द जग जाने पर एक दूसरे के रिश्ते में आकर पुस्तकों का अरण्य खड़ा कर देते हैं। शब्दों को नाद-लयों से जगा देने पर कविता के झरने बहने लगते हैं, शब्दों के विविध भाषाविभ्रम और ग्रन्थरूप रचना का सौन्दर्य पहला खण्ड ‘शब्द’ की आधारभूमि है। दूसरे खण्ड का शीर्षक है, ‘शब्दचित्र’ – इस खण्ड में चित्र, ध्वनि, शब्द, अभिनय आदि क्षेत्रों में विशेष योगदान के लिए संस्मरणीय प्रभाकर बरवे, अरुण साधु, कुमार गन्धर्व, स्मिता पाटिल, मृणाल सेन, राममोहन तथा पी.के. नायर के आत्मीय शब्दचित्रों का समावेश है। ईरान की प्राचीन और समृद्धि से परिपूर्ण संस्कृति का हार्दिक मिनिएचर शब्दचित्र मोहित किये बिना नहीं रहता।’ अनुनाद’ का अन्तिम खण्ड नाद लय ध्वनि की आदिकाल से लेकर आज तक की लम्बी यात्रा को गहराई से खोल कर दिखाने वाले प्रदीर्घ लेख ‘ध्वनि-माहात्म्य’ के साथ ही ‘दूर की प्रतिध्वनियाँ’ स्तिमित करने वाली हैं।
अरुण खोपकर के समग्र लेखन में विश्व बोध के साथ आसपास की गहन संवेदनाओं का सन्तुलन साधा गया है। सूचनाओं की यथातथ्यता, चकित कर देने वाली अन्तर्दृष्टि के और प्रज्ञाओं के स्थानों तथा अन्तर्मुख बना देने वाले मुकामों से यह विलक्षण गद्य निबन्ध विधा को नया रूपाकार देता है। पाठक की संवेदनाओं का दायरा फैलाने वाली और साहित्य-संस्कृति को समृद्ध बनाने वाली इस पुस्तक का समावेश ‘ पढ़ना अनिवार्य’ श्रेणी में ही किया जाएगा।
– चन्द्रकान्त पाटील


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Description

About the Author:

अरुण खोपकर
सिने निर्देशक, सिने विद् और सिने अध्यापक। राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सवों में सहभाग। फ़िल्म निर्देशन और निर्मिति के लिए तीन बार सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कारों से और पन्द्रह राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित। होमी भाभा फेलोशिप से सम्मानित ।
सत्यजित राय जीवन गौरव स्मृति सम्मान २०१५, ‘गुरुदत्त तीन अंकी शोकान्तिका’ सिनेमा पर सर्वोत्कृष्ट पुस्तक का राष्ट्रीय पुरस्कार १९८६ ।’ अनुनाद’- कथेतर विधा में महाराष्ट्र राज्य पुरस्कार २०२१।
विविध कलाओं पर आधारित सिनेमा तथा लेखन और अँग्रेजी, इतालवी, फ्रेंच, हिन्दी व कन्नड में अनूदित।
‘चलत् चित्रव्यूह’ साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०१५, ‘चित्रव्यूह’ और ‘चलत् चित्रव्यूह’ को महाराष्ट्र फाउण्डेशन पुरस्कार २०१४।
‘चित्रभास्कर’ व ‘रंगभास्कर’ भास्कर चन्दावरकर पर लिखित पुस्तकों की संकल्पना व सम्पादन, फ़िल्म एण्ड टेलीविजन इंस्टिट्यूट व नेशनल -फ़ल्म आर्काइव पुणे, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, सेण्ट्रल यूनिवर्सिटी, हैदराबाद, मॉस्को फ़िल्म इंस्टिट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज इन फ़िल्म डिरेकशन, ब्रिटिश फ़िल्म इंस्टिट्यूट वेस्ट मिन्स्टर विश्वविद्यालय व ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, वेनिस बिएनाले आदि संस्थानों में अध्यापन, व्याख्यान तथा संगोष्ठियों में हिस्सेदारी/चार एशियाई व पाँच यूरोपीय भाषाओं का अध्ययन।

निशिकान्त ठकार मराठी तथा हिन्दी के आलोचक तथा सुविख्यात अनुवादक हैं। अब तक उनकी हिन्दी-मराठी में ५८ पुस्तकें प्रकाशित हैं जिनमें हिन्दी में २० अनूदित, ६ स्वतन्त्र आलोचनात्मक पुस्तकें हैं। उन्हें विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास ‘नौकर की कमीज’ के अनुवाद के लिए साहित्य अकादेमी का पुरस्कार प्राप्त हुआ है। उनके द्वारा किये गये अरुण कोलटकर के ‘जेजुरी’ और ‘द्रोण’ के हिन्दी अनुवाद काफ़ी चर्चित रहे हैं।
निशिकान्त जी फ़िल्म सोसाइटी तथा विविध रंग मण्डलियों के साथ कार्यरत रहे हैं और अब तक उन्हें १५ राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय पुरस्कारों और जीवन गौरव सम्मानों से नवाज़ा गया है।

Additional information

ISBN

9789392228469

Author

Arun Khopkar

Binding

Paperback

Pages

428

Publication date

16-04-2022

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Imprint

Setu Prakashan

Language

Hindi

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