Bharat Ka Swadharam By Dharampal (Paperback)

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भारत का स्वधर्म – धर्मपाल


कोई भी समाज अपने स्वत्व में ही अपनी नियति को पहचान और पा सकता है। ब्रिटिश आधिपत्य और उस से उत्पन्न औपनिवेशिक मानसिकता ने भारत को उस की आत्मा से विलग करने के प्रभावी प्रयास किये हैं। यह भारतीय चित्त की अन्तर्निहित ऊर्जा ही है जिस के कारण यह प्रयास पूरा सफल नहीं हो पाया है। धर्मपाल गाँधीजी की परम्परा के उन विरले मनीषियों में हैं जिन्होंने भारतीय चित्त की बनावट और उस की ऊर्जा को समझने का सार्थक प्रयास किया है। उन्हें पश्चिम के चित्त और इतिहास की भी गहरी समझ है और पूर्व तथा भारत की भी। इसीलिए वे अन्य समाजों के प्रति विद्वेष या घृणा तथा किसी उग्र राष्ट्रवादी मुहावरे से बचते हुए भारत के मुहावरे में भारत को समझना चाहते हैं।
‘भारत का स्वधर्म’ उन के इसी प्रयास का महत्त्वपूर्ण सुफल है। औपनिवेशिक शासन और मानसिकता के कारण भारतीय समाज में आ गयी विकृतियों को रेखांकित करते हुए धर्मपाल उस दिशा का संकेत करते हैं जिस ओर चल कर ही भारत अपने स्वभाव की पहचान करता हुआ न केवल अपनी नियति की ओर अग्रसर हो सकता है बल्कि विश्व में अपनी विशिष्ट भूमिका का निर्वाह भी कर सकता है। ‘भारत का स्वधर्म’ इस देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य में रुचि रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक अनिवार्य पुस्तक है।


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Description

भारत का स्वधर्म औपनिवेशिक शासन और मानसिकता के कारण भारतीय समाज में आ गई विकृतियों को रेखांकित करता है।

About the Author:

धर्मपाल 19 फरवरी, 1922-24 अक्टूबर, 2006 मेरठ में जन्में धर्मपाल ने डी ए वी कॉलेज, लाहौर में शिक्षा पाने के साथ स्वाधीनता आन्दोलन में भाग लिया। मीरा बेन द्वारा ऋषिकेश के पास स्थापित एक ग्राम विकास संस्था से सम्बद्ध रहने के बाद असोसिएशन ऑव वालण्टरी आर्गनाइज़ेशन्स ऑव् रूरल डिवेलपमेण्ट के महासचिव और निदेशक (19551963) रहे। फिर अखिल भारतीय पंचायत परिषद् के शोध विभाग का कार्य (1963-65) देखते रहे। धर्मपाल ने जीवन के अंतिम पचास वर्ष अठारहवींउन्नीसवीं शती में इतिहास द्वारा उपेक्षित भारतीय समाज की शक्तियों-कमियों की खोज करने में लगाये हैं और देश-विदेश के अभिलेखागारों-ग्रन्थागारों से प्रभूत प्रमाण एकत्र किये हैं जिन से अंग्रेज शासन से पूर्व भारतीय समाज की एक ऐसी तस्वीर का पता चलता है जो आज के भारतीय मन में अंकित तस्वीर के सर्वथा विपरीत है। श्री धर्मपाल के प्रकाशित ग्रन्थ है—सिविल डिसओबिडिएन्स एण्ड इण्डियन ट्रेडीशन (बिबलिया इम्पेक्स, 1971), इण्डियन साइन्स एण्ड टेकनॉलॉजी इन द एटीन्थ सेन्चुरी, सम कण्टेम्पररी इण्डियन अकाउण्ट्स (बिबलिया इम्पेक्स, 1971) द मद्रास पंचायत सिस्टम, ए जनरल असेसमेण्ट (अवार्ड, 1973), द ब्यूटीफुल ट्री, इण्डिजिनस इण्डियन एजुकेशन इन द एटीन्थ सेन्चुरी (बिबलिया इम्पेक्स, 1983) अंग्रेजों से पहले का भारत, भारतीय चित्त, मानस व काल।

Additional information

ISBN

9789380441672

Author

Dharampal

Binding

Paperback

Pages

104

Publication date

26-06-2022

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Imprint

Vagdevi

Language

Hindi

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