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BHAS NATYA SAMGRA By Bharatratna Bhargva

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भास नाट्य समग्र – अनुवाद एवं सम्पादन भारतरत्न भार्गव


भास के समस्त नाट्यकर्म पर दिये गये पन्द्रह व्याख्यानों ने इस पुस्तक की उर्वरक रचना-भूमि तैयार की। ऐसा नहीं कि भास के नाटकों के हिन्दी भाषा में अनुवाद या पाठान्तर उपलब्ध नहीं हों, किन्तु भास के नाट्य विमर्श के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि वे अनुवाद पूरी तरह गद्यात्मक हैं जो नाट्य प्रस्तुति को पाश्चात्य पद्धति से मंचित करने के लिए बाध्य करते हैं। परिणामतः नाट्यशास्त्र में वर्णित आंगिक, वाचिक तथा सात्विक अभिनय का कोई अवकाश नहीं रह जाता।
भास के सभी नाटकों में वर्तमान समय के सामाजिकों और आधुनिक रंगमंचीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तनिक छूट ली गयी है, जिससे कि इन नाटकों की समकालीन उपयोगिता में यत्किचित वृद्धि हो सके। यह छूट भी भरतमुनि कृत नाट्यशास्त्र में निर्देशित संहिता के अनुसार ही ली गयी है। अतः इन नाटकों को हिन्दी अनुवाद न कहकर ‘पाठान्तर’ की संज्ञा दी गयी है। मूल नाटकों के पद्यांशों को छन्दबद्ध तथा गद्यांशों को मुक्त छन्द में प्रस्तुत किया गया है, जिससे आंगिक और वाचिक अभिनय में भाव, राग तथा ताल के तात्विक गुणों का समन्वय हो सके।
इस कार्य में परोक्ष रूप से मेरे गुरुतुल्य स्व. कावलम नारायण पणिक्कर जी से ग्राह्य अनेक रंग-युक्तियों का प्रयोग परिलक्षित है। भास के नाटकों पर उनके साथ किये गये रंगकर्म के कारण यह स्वाभाविक भी था। फिर भी यथासम्भव अधिकांश नाटकों में निजी प्रयोग इन पाठान्तरों की विशेषता रही है। ये विशेषकर हिन्दी भाषी रंगकर्मियों के लिए अधिक उपयोगी सिद्ध हो सकेंगे। खासतौर से नयी पीढ़ी के रंगकर्मियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ये प्रयोग किये गये हैं।


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Description

About the Author:

भारतरत्न भार्गव का जन्म 25 जनवरी 1938 को हुआ। राजस्थान विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी) लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय में प्राध्यापक और आकाशवाणी दिल्ली तथा इन्दौर में नाटक विभाग के कार्यक्रम अधिकारी। भारतीय भाषाओं के उपन्यास / कहानियों के लगभग 50 रेडियो रूपान्तर । कविता और रंगकर्म में विशेष रुचि। प्रो. मोहन महर्षि के निर्देशन में अभिनय की शुरुआत फिर अनेक नाटकों में अभिनय तथा रूपान्तर किया। बी.बी.सी. लन्दन में हिन्दी विभाग के प्रोड्यूसर संगीत नाटक अकादेमी के उपसचिव (नाटक) के रूप में कार्य करते हुए देश के लगभग सभी शीर्षस्थ निर्देशकों, नाटककारों, समीक्षकों से गहरा परिचय। डॉ. कमलेश दत्त त्रिपाठी के सान्निध्य में भरतमुनि कृत नाट्यशास्त्र का गहन अध्ययन तथा विश्लेषण पद्मभूषण कावलम नारायण पणिक्कर के अनेक मलयाली नाटकों का हिन्दी अनुवाद। पणिक्कर जी के निर्देशन में भास के अनेक नाटकों का हिन्दी पाठान्तर विशेष रूप से प्रतिज्ञायौगन्धरायण तथा स्वप्नवासवदत्ता की स्वप्नकथा शीर्षक से पुनर्रचना दो काव्य संकलन, दृश्यों की धार तथा घिसी चप्पल की कील एवं दो नाट्यालोचना की पुस्तकें, रंग हबीब तथा भारतीय नाट्य परम्परा एवं आधुनिकता प्रकाशित। संगीत नाटक अकादेमी का अमृत पुरस्कार, हिन्दी अकादमी, नयी दिल्ली का विशिष्ट कृति पुरस्कार एवं राज. संगीत नाटक अकादमी के कला पुरोधा सम्मान से विभूषित। नाट्यकुलम संस्थान के कुलगुरु, जहाँ दृष्टिबाधितों को ब्रेल लिपि में शिक्षा एवं नाट्याभिनय का प्रशिक्षण दिया जाता है। दृष्टिबाधितों के साथ तीन नाटकों का निर्देशन एवं लेखन / रूपान्तर स्मृतिशेष शम्भु मित्र के रंग-व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर समीक्षात्मक पुस्तक के अतिरिक्त भास के नाटकों तथा भारतीय रंग-मनीषियों पर निबन्धों की पुस्तकें शीघ्र प्रकाश्य । सम्प्रति : भारत सरकार के संस्कृति मन्त्रालय द्वारा प्रायोजित टैगोर नेशनल फेलोशिप के अन्तर्गत नाट्यशास्त्रीय परम्परा एवं प्रयोग विषय पर शोधकार्य में संलग्न ।


Additional information

ISBN

9788196234744

Author

Bharatratna Bhargva

Binding

Paperback

Pages

408

Publication date

25-02-2023

Imprint

Setu Prakashan

Language

Hindi

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