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Bastiyon Ka Karwan – Haricharan Prakash (Paperback)

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बस्तियों का कारवाँ – हरिचरण प्रकाश


भारत विभाजन पर कहानियों, उपन्यासों, वृत्तान्तों की कोई कमी नहीं है। भारत की हरेक भाषा में इस पर काफी रचनाएँ मिल जाएँगी, जिनमें से कुछ कृतियों को बहुत प्रसिद्धि और लोकप्रियता भी मिली है। भारत विभाजन ने इतने व्यापक फलक पर और इतनी गहराई से रचनाकारों को उद्वेलित किया तो इसका कारण देश का विभाजित होना और एक गहरे लगाव का आहत होना भर नहीं था। विभाजन ने इतने बड़े पैमाने पर आबादी की अदला-बदली और फलस्वरूप एक ऐसी अकल्पनीय त्रासदी को जन्म दिया जिसकी दूसरी मिसाल शायद ही हो। लाखों लोग मारे गये। अनगिनत लोग अपना गाँव-परिवेश, अपने घरबार छोड़कर, जहाँ वे पुश्त दर पुश्त रहते आए थे वहाँ से उखड़कर अनजान इलाकों में भटकने को विवश हुए। देखते-देखते उनका सबकुछ छिन गया था, वे शरणार्थी हो गये थे। इनमें अधिकतर संख्या पश्चिमी पाकिस्तान से आए पंजाबी हिन्दुओं और पूर्वी पाकिस्तान से आए बंगाली हिन्दुओं की थी। बेशक उनके जख्म भरने में वक्त लगा लेकिन अपनी भाषा और सामुदायिक संस्कृति को सहेजे रखने का सहारा उन्हें मिल गया क्योंकि यहाँ एक पंजाब और एक बंगाल मौजूद था। सिन्ध से आए शरणार्थियों का खयाल करें तो उनकी त्रासदी सांस्कृतिक भी जान पड़ेगी। अपनी उद्यमशीलता के बूते वे जल्दी ही अपने पैरों पर खड़े हो गये, यहाँ पूरी तरह रच-बस गये, लेकिन छितराये हुए। उनकी सामुदायिकता छिन्न-भिन्न हो गयी। हरीचरन प्रकाश का उपन्यास बस्तियों का कारवाँ इस मायने में अनूठा है कि इसने भारत विभाजन की त्रासदी को सिन्धी कोण से देखा और दिखाया है। परिवेश का सजीव वर्णन और भाषा का सहज प्रवाह इसे पढ़ने का अतिरिक्त आमन्त्रण देते हैं।


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Description

About the Author:

हरीचरन प्रकाश
जन्म : 10 नवम्बर 1950, फैजाबाद, उत्तर प्रदेश
प्रकाशन : जीविका जीवन, उपकथा का अन्त, गृहस्थी का रजिस्टर, सुख का कुआँ खोदते हुए : दिन-प्रतिदिन (कहानी संग्रह); एक गन्धर्व का दुःस्वप्न, बस्तियों का कारवाँ (उपन्यास)

Additional information

ISBN

9789393758408

Author

Haricharan Prakash

Binding

Paperback

Pages

216

Publication date

11-10-2022

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Language

Hindi

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