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Yeh Kya Jagah Hai Dosto… Varvar Rao

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ये क्या जगह है दोस्तो…  —  वरवर राव

(अनुवाद:  तुषार कान्ति)


सामन्ती-पूँजीवादी शोषण और साम्राज्यवादी विध्वंस का विरोध करते हुए जो लोग जनता को स्वावलम्बिता की आकांक्षा की कद्र करते हैं, जो भारत की सार्वभौमिकता का सम्मान करते हैं, ऐसे देशभक्तों और जनवादियों में से हर एक को इन प्रयोगों के बारे में जानना चाहिए।
भौतिक हिसा जितनी आसानी से समझ में आती है, व्यवस्था में अन्तर्निहित हिंसकता को समझ पाना उतना आसान नहीं है। जिस स्तर पर मुठभेड़ों, बारूदी सुरंग विस्फोटों, मुखबिरों के सफाये और पुलिस कैम्पों पर हमलों की रिपोर्टिंग होती है, मीडिया में इस वैकल्पिक समाज व्यवस्था के निर्माण के बारे में रिपोर्टिंग नहीं होती। जब युद्ध चल रहा हो तब उस युद्ध का प्रतिरोध कर रही जनता के जनयुद्ध के दौरान साथ-साथ सूजनशील उत्पादनकर्म और निर्माणकार्य में जनता की भागीदारी को रेखांकित करने वाली दृष्टि, रोजमर्रा के इन कामों को महत्त्व देने वाला नजरिया, सिर्फ उन्हीं के लिए मुमकिन है जो जनपक्षधर हैं। किसी परिवर्तन की चाल में, वेग में वह किस तरह का रूप ग्रहण करता जा रहा है, कैसे विकसित हो रहा है, इन बातों को समझने के लिए जनवादी दृष्टिका होना ही काफी नहीं, एक ऐतिहासिक भौतिकवादी नजरिया का होना भी बेहद जरूरी है।
– इसी पुस्तक से


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Description

Yeh Kya Jagah Hai Dosto… Varvar Rao


वरवर राव
जन्म: 3 नवम्बर 1940
जन्म स्थान : पेण्डयाला गाँव, जिला वारंगल, तेलंगाना।
बरवर राव परिचय के मोहताज नहीं। अपनी क्रान्तिकारी कविताओं के लिए भारत में ही नहीं, समूचे उपमहाद्वीप में विख्यात। विप्लव रचयिताला संघम (विरसम) और अखिल भारतीय क्रान्तिकारी सांस्कृतिक संघ के संस्थापक सदस्य।
तेलुगु भाषा में क्रान्तिकारी कवि के तौर पर एवं सामाजिक-राजनीतिक कार्य में पाँच दशक से अधिक समय से सक्रिय। ‘सृजना’ नामक तेलुगु साहित्य-पत्रिका का सम्पादन। ‘भविष्यत चित्रपटम’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में धारावाहिक रूप से प्रकाशित जेल डायरी सहित कविताओं तथा लेखों के करीब दो दर्जन संकलनों का तेलुगु भाषा में प्रकाशन और भारत की अन्य भाषाओं में अनुवाद प्रकाशित ।
अपनी राजनीतिक मान्यताओं के कारण प्राध्यापक की नौकरी छोड़ने को बाध्य हुए और 24 बार जेल भेजे गये।
सम्प्रति : भीमा कोरेगाँव षड्यन्त्र मामले में 2018 में गिरफ्तारी के बाद फरवरी 2021 में स्वास्थ्य आधार पर अस्थायी जमानत पर हुई अधूरी रिहाई के फलस्वरूप मुम्बई में रहने को बाध्य।


 

Additional information

ISBN

9789392228643

Author

Varvar Rao

Binding

Hardcover

Pages

336

Publication date

13-03-2022

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Language

Hindi

Imprint

Setu Prakashan

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