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E Mere Vatan – Raju Sharma

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ऐ मेरे वतन – राजू शर्मा 


ऐ मेरे वतन एक वृहद् और बहुस्तरीय उपन्यास है। राजू शर्मा के इस उपन्यास में वर्णित यथार्थ का फलक भी बड़ा है। किस्सागोई भी खूब है और इसकी भाषा रूढ़िमुक्त है, लेकिन इसके पीछे प्रयोजन जी बहलाव वाली पठनीयता पैदा करना नहीं बल्कि हमारे देश तथा समाज की दिनोदिन और भयावह होती जाती स्थितियों को इस तरह पेश करना है ताकि हम सोचने को विवश हों कि हम किधर जा रहे हैं! इस उपन्यास में कई समानान्तर कथाएँ चलती रहती हैं पर उनके तार इस कड़वी हकीकत से जुड़े रहते हैं जो रोज हमारे चारों तरफ घटित हो रही है। हम एक ऐसे दौर में हैं जब इंसाफ का दायरा रोज-ब-रोज और संकुचित हो रहा है, जब हिंसा और दमन की पराकाष्ठाएँ निर्मित हो रही हैं। जब सड़क पर एक नाटक खेलना या एक नज्म गाना भी गुनाह हो जाता है। फर्जी मुठभेड़, फर्जी मुकदमे, मुखबिरी, हर जगह सर्विलांस, विजिलैंटिज्म, डिटेंशन सेंटर, प्रोपेगेंडा, नौकरशाही, पुलिस, कानूनी प्रक्रियाएँ, सब आतंक के पर्याय बन गये हैं, खासकर एक समुदाय विशेष के लिए, जिन्हें लगातार ‘अन्य’ साबित करने और इस तरह जिनके अपमान और उत्पीड़न का सिलसिला चलता रहता है। यह उपन्यास हमें इस सवाल के रूबरू ला खड़ा करता है कि क्या देश में दोहरी न्यायप्रणाली चल रही है? क्या वास्तव में कानून के समक्ष सब समान हैं? क्या ‘पहचान’ कोई अतिरिक्त हक़ प्रदान करती है या शक किये जाने का अपने आप में पर्याप्त आधार है? समाज को ‘हम’ और ‘वे’ में बाँटने का महाषड्यन्त्र सिर्फ ‘अन्य’ पर कहर बनकर नहीं टूटता, वह इंसाफ और विवेक की सारी आवाजों का गला घोंट देता है। दिलचस्प शीर्षकों में विभाजित इस उपन्यास ने हमारे लोकतन्त्र की जैसी दारुण कथा पेश की है वह विरल है और विचलित भी करती है।


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Description

E Mere Vatan – Raju Sharma


About the Author:

राजू शर्मा:- जन्म : 1959। शिक्षा : दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर। लोक प्रशासन में पी-एच.डी.। 1982 से 2010 तक आईएएस सेवा में रहे। उसके बाद से स्वतंत्र लेखन, मुसाफ़रत और यदा-कदा की सलाहनवीसी। लेखन के अलावा रंगकर्म, फ़िल्म व फ़िल्म स्क्रिप्ट लेखन में विशेष रुचि। प्रकाशन : हलफनामे, विसर्जन, पीर नवाज़, क़त्ल गैर इरादतन (उपन्यास); व्यभिचारी, नोटिस २ (उपन्यासिका); शब्दों का खाकरोब, समय के शरणार्थी, नहर में बहती लाशें (कहानी-संग्रह); भुवनपति, मध्यमवर्ग का आत्मनिवेदन या गुब्बारों की रूहानी उड़ान, जंगलवश (नाटक)। कायान्तरण (अनूदित उपन्यास) । अनेक नाटकों का अनुवाद व रूपांतरण – पिता (ऑगस्त स्ट्रिनबर्ग)।

Additional information

ISBN

9789393758705

Author

Raju Sharma

Binding

Paperback

Pages

520

Publication date

25-02-2023

Imprint

Setu Prakashan

Language

Hindi

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