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Jo Kahin – Atul Deulgaonkar Translation By Gorakh Thorat

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जो कहिन (…. संवाद महेश एलकुंचवार से) 

महेश एलकुंचवार एक विख्यात मराठी नाटककार, पटकथाकार, निबन्धकार और अभिनेता रहे हैं। पेशे से प्रोफेसर रहे महेश एलकुंचवार की भारतीय रंगमंच के महान नाटककारों में गणना होती है। उनके प्रसिद्ध नाटक हैं- ‘यातनाघर’, ‘वासनाकांड’, ‘गार्बो’, ‘वाडा चिरेबंदी’, ‘भग्न तळ्याकाठी’, ‘युगान्त’, ‘आत्मकथा’, ‘वासांसि जीर्णानि’, ‘सोनाटा’, ‘एका नटाचा मृत्यू’, ‘आत्मकथा’, ‘धर्मपुत्र’, ‘पार्टी’, ‘प्रतिबिम्ब’, ‘रक्तपुष्प’, ‘वास्तुपुरुष’, ‘सुलतान’ आदि। उनकी ‘मौनराग’ तथा ‘ त्रिबन्ध’ आदि ललित रचनाएँ भी चर्चित रही हैं।
महेश एलकुंचवार ने अपनी नाट्य रचनाओं के माध्यम से नाट्य अभिव्यक्ति के अनेक रूपों का परिचय दिया है। उन्होंने यथार्थवादी, प्रतीकात्मक, अभिव्यक्तिवादी शैली में रचना की है। उन्हें एक जीवनवादी नाटककार के रूप में देखा जाता है। महेश एलकुंचवार के नाटक बहुत चर्चित और लोकप्रिय हैं। उनके नाटकों का भारतीय और कई पश्चिमी भाषाओं में अनुवाद किया गया है।
महेश एलकुंचवार को ‘युगान्त’ नाटक के लिए सन् 2002 का साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त हुआ है। साथ ही सन् 2003 में उन्हें सरस्वती सम्मान से सम्मानित किया गया है। इनके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार, अखिल भारतीय नाट्य परिषद् पुरस्कार, जनस्थान पुरस्कार, महाराष्ट्र राज्य सरकार का उत्कृष्ट नाटक सम्मान आदि अनेक पुरस्कारों से नवाजा गया है।


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Description

About the Author:
अतुल देऊलगांवकर

अतुल देऊलगांवकर एक लेखक होने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण सम्बन्धी विशेष हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणसम्बन्धी विभिन्न वैश्विक सम्मेलनों में सहभाग लिया है। ये विभिन्न माध्यमों से पर्यावरण कृषि आपदा प्रबन्धन, विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषयों पर अपने मौलिक विचार प्रस्तुत करते रहे हैं। मराठी में इनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं जिनमें मळले भूमण्डज’, ‘स्वामीनाथन-भूकमुक्तीचा ध्यास बखर पर्यावरणाची आणि विवेकी पर्यावरणवाद्याची ‘विश्वाचे आर्त न्यायाच्या व सम्मानाच्या शोधात सफाई कामगारांची सांगीतली न गेलेली कथा’, ‘लॉरी बेकर दूब इन आर्किटेक्चर’, ‘पेटाची हाक तुम्हाला ऐकू येतेयना ? ‘पृथ्वीचे आख्यान’ आदि प्रमुख है। अपने कार्य के लिए श्री देऊसगांवकर को गाडगिल पुरस्कार, राष्ट्रीय ग्रामीण पत्रकारिता पुरस्कार डॉ. राम आपटे प्रभोधन पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण पत्रकार पुरस्कार, अनीता आवास फाउण्डेशन का संघर्ष पुरस्कार किलोस्कर वसुन्धरा पर्यावरण पत्रकार पुरस्कार आदि अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से पुरस्कृत किया गया है। साथ ही आपको जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण सम्बन्धी आपके कार्य के लिए राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय फेलोशिप भी प्रदान की गयी है।


डॉ. गोरख थोरात
जन्म: 1969 डॉ. गौरख चोरात समकालीन हिन्दी अनुवादकों में एक चर्चित नाम है। हिन्दी में आपको अनेक आलोचनात्मक पुस्तकें प्रकाशित हैं, परन्तु आपकी पहचान बतौर एक अनुवादक बनी हुई है। इन्होंने ‘हिन्दू-जीने का समृद्ध कबाड़’, ‘देखणी” ‘जोगवा’ ‘बालगन्धर्व’, ‘तर्क के खूँटे से ‘और आखिरकार’, ‘महात्मा’, ‘प्रधानमन्त्री नेहरू’ ‘नदीष्ट’ समेत विविध विधाओं की बीस पुस्तकों का अनुवाद किया है। इनके अलावा रसा फाउंडेशन नयी दिल्ली के लिए ‘चित्रमय भारत (मित्रकला), ‘अरानेदार गायकी (संगीत), रुजुवात (आलोचना) तथा ‘पोत’ (स्थापत्य) आदि कला-सम्बन्धी रचनाओं का भी अनुवाद किया है। आपको ‘हिन्दू-जीने का समृद्ध कबाड़’ उपन्यास के अनुवाद के लिए महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी का मामा वरेरकर पुरस्कार, ‘देखणी’ कविता संकलन के अनुवाद के लिए अमर उजाला
फाउंडेशन का’ भाषाबन्धु’ पुरस्कार तथा बालगन्धर्व’ उपन्यास के अनुवाद के लिए Valley of Words International Literary and Arts Festreal 2019 Dehradun का श्रेष्ठ अनुवाद पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। सम्माति आप बतौर हिन्दी प्रोफेसर एस पी. कॉलेज, पुणे में कार्यरत हैं।

Additional information

ISBN

9788196103460

Author

Atul Deulgaonkar

Binding

Paperback

Pages

129

Publication date

25-02-2023

Imprint

Setu Prakashan

Language

Hindi

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