Description
मार्ग मादरज़ाद-पीयूष दईया की आत्मा के दायरों में फिसलते मनुष्य की यात्रा का मार्ग है। यह मार्ग निर्विघ्न नहीं है क्योंकि इसमें ‘श्मशानी शऊर’ की ‘वर्णमाला’ सीखे लोगों की साँसें निर्बिम्ब’ हैं। इस निर्बिम्ब की कथा, कहानी, उपन्यास आदि आख्यानात्मक विधाओं में भी दर्ज की जाये, तो भी उसका आस्वाद यथा-स्थितिवादी आस्वाद में व्यतिरेक उत्पन्न करता है। पर जब निर्बिम्ब की कथा कविता जैसी विधा में हो, तो आस्वादक की भूमिका बढ़ जाती है।
About the Author:
जन्म : अगस्त 1972, बीकानेर (राज.) प्रकाशित-कृतियाँ : दो कविता-संग्रह और अनुवाद की दो पुस्तकें। चार चित्रकारों के साथ पुस्तकाकार संवाद। साहित्य, संस्कृति, विचार, रंगमंच और लोक-विद्या पर एकाग्र पच्चीस से अधिक पुस्तकों और पाँच पत्रिकाओं का सम्पादन। सम्प्रति : रज़ा फ़ाउण्डेशन की एक परियोजना ‘रज़ा पुस्तक माला से सम्बद्ध।






























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