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Meeraji – Us Paar Ki Shaam (Sanchayan) – Meeraji (Paperback)

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‘मीराजी -उस पार की शाम’ – शीन काफ़ निज़ाम


हिन्दी में हम उर्दू साहित्य से जितना परिचित हैं उतने से यह कहा जा सकता है कि मीराजी एक तरह के रहस्य और किंवदन्ती पुरुष रहे हैं। उनका नवाचार और प्रश्नवाची आधुनिकता उनके प्रति आकर्षित करती रही है। उर्दू के प्रतिष्ठित कवि-मित्र शीन काफ़ निज़ाम ने मीराजी की कविता और गद्य का यह सुघर संचयन तैयार किया है और युवा लेखक बृजेश अम्बर ने इसका उर्दू से लिप्यन्तरण किया है। हमें विश्वास है कि यह हमें मीराजी के सृजन, कल्पना और जिज्ञासा के वितान से बेहतर परिचित कराने में समर्थ होगा : विद्यापति से चार्ल्स बॉदलियर तक की कविता पर लिखने वाला उर्दू तो क्या हिन्दी में कोई कवि नज़र नहीं आता, मीराजी के सिवाय। हम यह संचयन प्रसन्नतापूर्वक रज़ा पुस्तक माला में प्रस्तुत कर रहे हैं।

— अशोक वाजपेयी


Editor : Sheen Kaaf Nizam
चयनित एवं संपादित : शीन काफ़ निज़ाम
Translation: Brijesh Amber
उर्दू से लिप्यंतरण -बृजेश अम्बर

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Description

‘मीराजी -उस पार की शाम’ – शीन काफ़ निज़ाम / Meeraji – Us Paar Ki Shaam (Sanchayan) – Meeraji – Paperback Edition


About The Author

शीन काफ़ निजाम
२६ नवम्बर, १९४५ को जोधपुर में पैदा हुए शीन काफ़ निज़ाम ने शाइरी के साथ-साथ आलोचना, शोध और सम्पादन में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। जिसके लिए उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार, राष्ट्रीय इक़बाल सम्मान, भारतीय भाषा संस्थान द्वारा भाषा-भारती सम्मान, बेगम अख्तर ग़ज़ल सम्मान तथा राजस्थान उर्दू अकादेमी का सर्वोच्च ‘महमूद शीरानी सम्मान’ से सम्मानित किया गया है।
आपकी शाइरी के प्रकाशित संग्रहों में ‘दश्त में दरिया’, ‘साया कोई लम्बा न था’, ‘सायों के साये में’, ‘रास्ता ये कहीं नहीं जाता’ और ‘गुमशुदा दैर की गूँजती घण्टियाँ’ देवनागरी में, तथा ‘नाद’, ‘बयाज़े खो गयी है’ और ‘गुमशुदा दैर की गूंजती घण्टियाँ’ उर्दू में उल्लेखनीय हैं।
‘लफ़्ज़ दर लफ़्ज़’ और ‘मानी दर मानी’ आलोचनात्मक और विवेचनात्मक पुस्तकों के अलावा ‘ग़ालिबियत और गुप्ता रिज़ा’ (माहिरे-ग़ालिबियात स्व. अल्लामा कालीदास गुप्ता ‘रिज़ा’) और ‘भीड़ में अकेला’ (स्व. मख्पूर सईदी पर केन्द्रित) के सम्पादन के साथ उर्दू की साहित्यिक पत्रिकाओं का भी सम्पादन किया है।
नन्दकिशोर आचार्य के साथ उर्दू कवियों का संचयन और सम्पादन के साथ-साथ हिन्दी तथा राजस्थानी का उर्दू एवं उर्दू साहित्य का हिन्दी में अनुवाद और लिप्यन्तरण भी किया है।
सम्पर्क : कल्लों की गली, जोधपुर-३४२००१


बृजेश अम्बर
शाइर, समीक्षक और अनुवादक। भारत और पाकिस्तान की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं एवं संकलनों में प्रकाशित। साहित्य अकादेमी दिल्ली के लिए अनुवाद कार्य। महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा के दूर शिक्षा कार्यक्रम के लिए पाठ्य सामग्री निर्माण में योगदान। दूरदर्शन और आकाशवाणी पर कार्यक्रमों का निरन्तर प्रसारण। नज़ीर अकबराबादी की शाइरी का ‘लाद चलेगा बंजारा’ शीर्षक से सम्पादन। शाइरी के लिए राजस्थान पत्रिका का सृजनात्मक साहित्य प्रथम पुरस्कार से सम्मानित । २३ भाषाओं के संकलन में उर्दू कवि के तौर पर शामिल ।

Additional information

ISBN

9789389830767

Author

Meeraji

Binding

Paperback

Pages

194

Publisher

Setu Prakashan Samuh

Imprint

Setu Prakashan

Language

Hindi

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