Description
“उसका नाम अहमद अंसारी है, सर। बीवी हिंदू है। सुनीता। मामला सचमुच सीरियस है।” पुलिस आयुक्त ने फ़ोन के चोगे को बताया।
चोगे से हुंकार निकली। ” हूँऽऽऽ हूँऽऽऽ, शक के पुख्ता आधार हैं।”
“उसकी बीवी ने बम होने की पुष्टि कर दी है, सर।” पुलिस आयुक्त ने फिर से फ़ोन के चोगे को बताया। “उसने तो एक फ़ोन भी कर दिया था मगर हमारे मुस्तैद सिपाहियों ने बात पूरी होने नहीं दी और उसका मोबाइल छीन लिया। हम उस नंबर को अब ट्रेस कर रहे हैं जिस पर उसने फ़ोन किया…”
“मोबाइल को तो उसी समय छीन लेना चाहिए था जब उन्हें थिएटर के बाहर पकड़ा गया था।” विशेष कोष्ठक के मुखिया ने विद्रूप से मुस्कराते हुए कहा।
तभी बम निस्तारण दस्ते के नेता ने बैरक से बम निस्तारण दस्ते के प्रमुख को फ़ोन किया।
“सर यह बेहद गंभीर मामला है।” उसने कहा। “उसके पास जैसा बम है उससे हम परिचित ही नहीं हैं। कहता है वह उसके दिल के अंदर है। एक बेल्ट भी है जिसमें बैटरी है जिससे वह चार्ज होता है…”
– इसी पुस्तक से
About The Author
अंजली देशपांडे
अनेक आंदोलनों से जुड़ी और पत्रकार रहीं अंजली देशपांडे के दो उपन्यास छप चुके हैं। भोपाल गैस त्रासदी की पृष्ठभूमि में पहला उपन्यास अँग्रेज़ी में, ‘इंपीच्मेंट’ शीर्षक से ‘हशेट इंडिया’ ने और हिंदी में ‘महाभियोग’ शीर्षक से राजकमल प्रकाशन ने छापा। दूसरा उपन्यास ‘हत्या’ राजपाल एंड संस से प्रकाशित । रुचियों के आधिक्य से साधनों का मेल बिठाने में जुटी, पति के साथ दिल्ली में रहती हैं और आजकल कौओं से चोंच लड़ा रही हैं। यह उनका पहला कहानी संकलन है।


































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